पटना हाईकोर्ट की ऐतिहासिक उपलब्धि: 46 न्यायाधीशों के साथ न्याय के नए युग की होगी शुरुआत

पटना हाईकोर्ट की ऐतिहासिक उपलब्धि: 46 न्यायाधीशों के साथ न्याय के नए युग की होगी शुरुआत

पटना हाईकोर्ट अब न्यायिक इतिहास में पहली बार 46 न्यायाधीशों के साथ कार्य करेगा। यह महत्वपूर्ण बदलाव सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा हुई बैठक में मंजूरी दिए जाने के बाद संभव हुआ।

Patna: पटना हाईकोर्ट के न्यायिक इतिहास में एक अभूतपूर्व क्षण आ गया है। पहली बार अदालत 46 न्यायाधीशों के साथ कार्य करेगी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाल ही में 9 वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न्यायाधीश नियुक्त करने की मंजूरी दी है, जिससे अदालत की कुल कार्यरत क्षमता अब तक के उच्चतम स्तर तक पहुंचेगी। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद, हाईकोर्ट में कुल कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 46 हो जाएगी। 

पटना हाईकोर्ट में कुल 53 स्वीकृत न्यायाधीश पद हैं। इसका मतलब है कि अदालत अब 87 प्रतिशत क्षमता के साथ काम करेगी। यह अदालत के इतिहास में सबसे बड़ा कार्यरत बल होगा और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाएगा।

नए न्यायाधीशों की सूची

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा जिन नौ अधिवक्ताओं को न्यायाधीश नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है, उनमें शामिल हैं:

  • मो. नदीम सिराज
  • रंजन कुमार झा
  • कुमार मनीष
  • संजीव कुमार
  • गिरिजिश कुमार
  • आलोक कुमार
  • राज कुमार
  • राणा विक्रम सिंह
  • विकास कुमार

ये नियुक्तियां अदालत के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में हुई हैं, जिसे संस्थान के लिए ऐतिहासिक और अभूतपूर्व क्षण माना जा रहा है।

सेवानिवृत्ति और न्यायिक निरंतरता

साल 2026 में तीन वरिष्ठ न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं:

  • मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू – 4 जून 2026
  • न्यायाधीश नवनीत कुमार पांडेय – 28 फरवरी 2026
  • न्यायाधीश बिबेक चौधरी – 31 अक्टूबर 2026

इन नियुक्तियों के साथ अदालत में न्यायिक निरंतरता बनी रहेगी और सेवानिवृत्ति के बावजूद कार्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इससे लंबित मामलों की सुनवाई समय पर हो सकेगी और न्यायिक प्रक्रिया और प्रभावी बनेगी।

बार और विधि जगत में खुशी

न्यायाधीश नियुक्तियों की खबर पर बार और विधि जगत में खुशी का माहौल है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा, बिहार स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा, और महाधिवक्ता पी.के. शाही सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इसे सकारात्मक कदम बताया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत अब लगभग पूर्ण क्षमता के साथ कार्य करने जा रही है। इससे लंबित मामलों का निष्पादन तेजी से होगा और आम जनता को समयबद्ध न्याय मिल सकेगा।

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