क्रॉनिक किडनी डिजीज दुनिया में तेजी से बढ़ रही है और 2023 में यह मौत का नौवां सबसे बड़ा कारण बन गई। द लैंसेट की ग्लोबल स्टडी के अनुसार दुनिया के करीब 788 मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं। शुरुआती लक्षण मामूली होने के कारण इसे साइलेंट किलर माना जाता है, जबकि डायबिटीज, हाई बीपी और मोटापा इसके प्रमुख कारण हैं।
क्रॉनिक किडनी डिजीज: दुनिया भर में क्रॉनिक किडनी डिजीज तेजी से फैल रही है और द लैंसेट में प्रकाशित नई ग्लोबल स्टडी के अनुसार 2023 में यह मौत का नौवां सबसे बड़ा कारण बन गई। रिपोर्ट बताती है कि करीब 788 मिलियन वयस्क किसी न किसी स्तर की किडनी बीमारी से जूझ रहे हैं और भारत व चीन इसके सबसे बड़े प्रभावित देशों में शामिल हैं। यह बीमारी शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं देती, जिसके कारण लोग देर से जांच कराते हैं और स्थिति गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती मेटाबॉलिक बीमारियां और देर से पहचान CKD को वैश्विक स्वास्थ्य संकट बना रही हैं।
किडनी रोग इतना तेजी से क्यों बढ़ रहा है
क्रॉनिक किडनी डिजीज के पीछे मेटाबॉलिक बीमारियां सबसे बड़ा कारण मानी जा रही हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा धीरे-धीरे किडनी के नाजुक फिल्टर को कमजोर कर देते हैं। उम्र बढ़ने पर भी किडनी फंक्शन धीमा होता है, इसलिए बुजुर्गों में CKD का खतरा ज्यादा रहता है।
इसके अलावा शुरुआती जांच की कमी भी इसका बड़ा कारण है। कई देशों में GFR या यूरिन अल्बुमिन टेस्ट आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। लोग तब जांच करवाते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। यही वजह है कि CKD को साइलेंट किलर कहा जाता है।

लक्षण जिन्हें हल्के में न लें
किडनी की खराबी शुरुआत में कोई बड़े लक्षण नहीं देती। लेकिन समय के साथ कुछ संकेत दिखने लगते हैं, जैसे यूरिन में बदलाव, कम या ज्यादा यूरिन आना, झाग बनना या खून के निशान। कई लोगों में पैर, हाथ और आंखों के नीचे सूजन दिखती है।
बीमारी बढ़ने पर थकान, भूख कम होना, मिचली, सूखी त्वचा और सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ये संकेत बताते हैं कि किडनी शरीर से वेस्ट फिल्टर नहीं कर पा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
कैसे बचा जा सकता है किडनी रोग से
डॉक्टर्स का कहना है कि CKD की शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण है। नियमित रूप से GFR और यूरिन अल्बुमिन टेस्ट कराना जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। डायबिटीज, हाई बीपी और वजन को नियंत्रित रखना सबसे जरूरी कदम है।
लाइफस्टाइल की छोटी-छोटी आदतें भी किडनी को सुरक्षित रख सकती हैं। नमक कम करें, धूम्रपान बंद करें और पर्याप्त पानी पीएं। इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड कम खाएं और नियमित वॉक या व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।













