भारतीय सेना में ब्रिगेडियर कर्नल से उच्च रैंक है और इसमें अधिक जिम्मेदारी और वेतन होता है। कर्नल, मेजर जनरल और लेफ्टिनेंट जनरल के बाद थल सेना प्रमुख सबसे ऊंचा पद है। सेना में रैंक सिस्टम अनुभव, सेवा अवधि और चयन बोर्ड के आधार पर तय होता है, जिससे अधिकार, जिम्मेदारी और सैलरी क्रमशः बढ़ती है।
Army Rank Hierarchy: भारतीय सेना में कर्नल और ब्रिगेडियर रैंक के बीच अंतर स्पष्ट है। कर्नल एक कमांडिंग रैंक है, जबकि ब्रिगेडियर सीनियर पद होने के कारण अधिक अधिकार और जिम्मेदारी संभालते हैं। प्रमोशन बोर्ड और सेवा अनुभव के आधार पर पद तय किए जाते हैं। इसके बाद मेजर जनरल और लेफ्टिनेंट जनरल आते हैं, जबकि थल सेना प्रमुख (सीओएएस) चार स्टार जनरल रैंक पर पूरे आर्मी कमांड के प्रभारी होते हैं। इस हायरार्की में वेतन और जिम्मेदारी रैंक के अनुसार बढ़ती है, जो सेना में अनुशासन और संचालन को सुनिश्चित करती है।
कौन-सी रैंक है ऊंची
भारतीय सेना में ब्रिगेडियर की रैंक कर्नल से ऊपर होती है। कर्नल कमांडिंग रैंक के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हैं, जबकि ब्रिगेडियर एक सीनियर पद है और प्रमोशन के लिए विशेष चयन बोर्ड द्वारा चुना जाता है। ब्रिगेडियर को 1,39,600 से 2,17,600 रुपये प्रति माह वेतन मिलता है, जबकि कर्नल का वेतन 1,30,600 से 2,15,900 रुपये है।
सेना की रैंक हायरार्की के हिसाब से कर्नल और ब्रिगेडियर के बाद मेजर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल और फिर थल सेना प्रमुख यानी चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ की रैंक आती है। ये पद चार स्टार जनरल रैंक में आते हैं और पूरे आर्मी कमांड की जिम्मेदारी संभालते हैं।

आर्मी रैंक सिस्टम और प्रमोशन प्रक्रिया
भारतीय सेना में ऑफिसर लेवल एंट्री पर लेफ्टिनेंट पद से शुरुआत होती है। इसके बाद कैप्टन, मेजर और लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक मिलती है। प्रत्येक पद के साथ जिम्मेदारी, अधिकार और सैलरी बढ़ती है। कर्नल बनने के लिए लगभग 13 साल की कमीशन सर्विस पूरी करनी होती है।
ब्रिगेडियर बनने के लिए विशेष चयन बोर्ड का गठन होता है। इसमें सीनियर अधिकारी शामिल रहते हैं और प्रमोशन उम्मीदवार की रिकॉर्ड, अनुशासन और प्रदर्शन पर आधारित होता है। ब्रिगेडियर पद पर सैकड़ों या हजारों सैनिकों की यूनिट कमांड की जा सकती है।
सेना में जिम्मेदारियों का क्रम
कर्नल और ब्रिगेडियर के बाद मेजर जनरल और लेफ्टिनेंट जनरल की रैंक आती है। मेजर जनरल के अधीन हजारों सैनिकों की यूनिट काम करती है, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल प्रमुख स्टाफ ट्रेनिंग और प्लानिंग कार्यों में शामिल रहते हैं। थल सेना प्रमुख (सीओएएस) चार स्टार जनरल रैंक पर रहते हैं और पूरे आर्मी कमांड की कमान उनके हाथ में होती है।
वर्तमान में थल सेना प्रमुख को 2,50,000 रुपये निश्चित वेतन मिलता है, इसके अलावा मिलिट्री सर्विस पे और अन्य भत्ते भी शामिल होते हैं।











