बिहार के दरभंगा के रहने वाले आईपीएस केशव कुमार चौधरी ने दूसरे प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 137 हासिल की। साधारण परिवार से आने वाले केशव ने कड़ी मेहनत और सही रणनीति के दम पर सफलता पाई और बाद में पुलिस सेवा में कई अहम पदों पर काम करते हुए सम्मान भी प्राप्त किया।
UPSC Success Story: बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले केशव कुमार चौधरी ने साल 2009 में दूसरे प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 137 हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा में स्थान बनाया। साधारण परिवार से आने वाले केशव ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई के दौरान सिविल सेवा की तैयारी शुरू की थी। पहले प्रयास में मेन्स तक पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी रणनीति मजबूत की और अगले प्रयास में सफलता हासिल की। बाद में पुलिस सेवा में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई और उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान भी प्राप्त किए।
दूसरे प्रयास में मिली UPSC में सफलता
बिहार के दरभंगा जिले में 9 जनवरी 1981 को जन्मे केशव कुमार चौधरी एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता जिला कचहरी में कार्यरत थे और परिवार में शिक्षा व अनुशासन को काफी महत्व दिया जाता था। बचपन से ही उनका झुकाव पढ़ाई और प्रशासनिक सेवा की ओर था।
उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई दरभंगा में पूरी की और इंटरमीडिएट के दौरान ही तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सेवा में जाना है। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास, पॉलिटिकल साइंस और हिंदी विषयों के साथ ग्रेजुएशन किया और उसी दौरान UPSC की तैयारी शुरू कर दी।
पहले प्रयास से मिली सीख, दूसरे में हासिल की रैंक
UPSC की तैयारी के दौरान केशव कुमार चौधरी ने पहले ही प्रयास में मेन्स परीक्षा तक पहुंचकर अपनी क्षमता दिखा दी थी। हालांकि उस समय उनका अंतिम चयन नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने इसे असफलता नहीं बल्कि सीख के रूप में लिया।
दूसरे प्रयास में उन्होंने अपनी रणनीति को और बेहतर बनाया और साल 2009 में ऑल इंडिया रैंक 137 हासिल कर IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। उनकी यह उपलब्धि दिखाती है कि सही दिशा में लगातार मेहनत से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

पुलिस सेवा में जिम्मेदारी और सम्मान
IPS बनने के बाद केशव कुमार चौधरी ने कई अहम पदों पर काम किया और अपने काम से अलग पहचान बनाई। उनकी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें 2013 में सीनियर ग्रेड में प्रमोशन मिला।
आगे चलकर 1 जनवरी 2023 को उन्हें डीआईजी रैंक पर पदोन्नत किया गया। उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें 2021 में डीजीपी सिल्वर डिस्क और 2024 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर डीजीपी गोल्ड डिस्क से सम्मानित किया गया।
डकैतों के खिलाफ अभियान से मिली पहचान
अपने करियर के दौरान चित्रकूट में तैनाती के समय उन्होंने डकैतों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में कई गिरोहों के सफाये में उनकी अहम भूमिका रही, जिससे क्षेत्र में कानून व्यवस्था मजबूत हुई।
इसके अलावा वे झांसी में डीआईजी, आगरा पुलिस कमिश्नरेट में अपर पुलिस आयुक्त और बहराइच में एसएसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इन पदों पर काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व का मजबूत उदाहरण पेश किया।











