बिहार की राजनीति में तेज प्रताप यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव और बहनों से आठ महीने बाद मुलाकात की है। यह मुलाकात लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में आरोप तय होने के बाद हुई, जिसमें तेज प्रताप पर भी आरोप तय किए गए हैं।
पटना: लैंड फॉर जॉब केस में तेज प्रताप यादव पर भी आरोप तय किए गए हैं। करीब आठ महीने तक घर और पार्टी से अलग रहने के बाद उनकी अपने पिता और बहनों से मुलाकात हुई। इस मौके पर तेज प्रताप ने कहा कि यह लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी। अपनी बड़ी बहन सांसद मीसा भारती के आवास पर उन्होंने पिता और बहन से मिलकर 14 जनवरी को पटना में आयोजित दही-चूड़ा भोज का नियोता दिया।
अपने आवास से निकलते समय तेज प्रताप ने खुद कहा कि “चूड़ा-दही का इन्विटेशन दे दिया है। आशीर्वाद देने आएंगे कि नहीं?” इस पर उन्होंने जवाब दिया, काहे नहीं आएंगे, आशीर्वाद देने जरूर आएंगे।
आठ महीने बाद परिवार से मुलाकात
तेज प्रताप यादव को पिछले आठ महीनों में अपने घर और पार्टी से अलग रखा गया था। इस लंबी दूरी के बाद वह अपने पिता और बहनों से मिलने आए और परिवार के साथ बातचीत की। मुलाकात के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, दही-चूड़ा का न्योता दे दिया है। आशीर्वाद देने आएंगे कि नहीं? काहे नहीं आएंगे, आशीर्वाद देने जरूर आएंगे।
इस मुलाकात में तेज प्रताप ने परिवार के समर्थन और आशीर्वाद की अहमियत को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि वह इस लड़ाई को मजबूती से लड़ेंगे और परिवार की सहमति और आशीर्वाद उनके लिए बहुत मायने रखता है।

तेजस्वी यादव को नहीं दिया न्योता
हालांकि तेज प्रताप यादव का कोर्ट में आमना-सामना हुआ बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से, लेकिन दोनों भाइयों की दूरी कम नहीं हुई। तेज प्रताप ने सीधे तौर पर तेजस्वी को दही-चूड़ा भोज का न्योता नहीं दिया, जिससे दोनों के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत दूरी बनी रही। कुछ दिन पहले तेज प्रताप ने संकेत दिया था कि भोज के लिए तेजस्वी को न्योता दिया जा सकता है। लेकिन मुलाकात के दौरान ऐसा नहीं हुआ। इसके चलते अब कयास लगाए जा रहे हैं कि तेजस्वी को किसी माध्यम से न्योता भेजा जा सकता है। हालांकि, उनके भोज में शामिल होने पर सस्पेंस अभी भी कायम है।
यह मुलाकात तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच दूसरी बार आमना-सामना थी। पिछली बार बिहार चुनाव के दौरान दोनों भाइयों में कुछ दूरी दिखाई दी थी, जो पूरी तरह कम नहीं हो सकी। तेज प्रताप यादव जोर-शोर से दही-चूड़ा भोज की तैयारियों में जुटे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने इस भोज में RJD या कांग्रेस नेताओं की तुलना में सत्ता दलों के नेताओं को अधिक तवज्जो दी है। माना जा रहा है कि यह कदम राजनीतिक गठजोड़ और भविष्य की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
भोज के दौरान परिवार और राजनीतिक साथियों के बीच मुलाकात और बातचीत के जरिए तेज प्रताप अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करना चाह रहे हैं। उनका यह कदम पार्टी और परिवार में अपनी छवि को सुधारने और समर्थन जुटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।









