मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दो खेमों में बंटी दुनिया, रूस-चीन ने जताया विरोध, नेताओं के बयान आए सामने

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दो खेमों में बंटी दुनिया, रूस-चीन ने जताया विरोध, नेताओं के बयान आए सामने

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक राजनीति में भूचाल आ गया है। रूस और चीन ने कड़ी निंदा की, जबकि कुछ देशों और वैश्विक हस्तियों ने इस कार्रवाई का समर्थन किया है।

World News: वेनेजुएला पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद पूरी दुनिया की राजनीति दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है। अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है। इस घटना के बाद जहां रूस और चीन जैसे बड़े देश अमेरिका के कदम की कड़ी निंदा कर रहे हैं, वहीं कुछ देश और वैश्विक हस्तियां इस कार्रवाई को सही ठहरा रही हैं। 

दुनिया भर से आ रही प्रतिक्रियाओं ने साफ कर दिया है कि यह मामला केवल वेनेजुएला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भी पड़ सकता है।

अमेरिकी कार्रवाई के बाद क्या हुआ वेनेजुएला में

अमेरिका द्वारा की गई इस कार्रवाई के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को राजधानी काराकास से गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया है। इस कदम के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक संकट और गहरा गया है। देश पहले से ही आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा था, लेकिन अब सत्ता के शीर्ष पर इस तरह की कार्रवाई ने हालात और संवेदनशील बना दिए हैं। अमेरिका के इस कदम को कुछ लोग तानाशाही के खिलाफ कार्रवाई बता रहे हैं, तो कुछ इसे सीधे तौर पर एक संप्रभु देश की संप्रभुता पर हमला मान रहे हैं।

रूस की तीखी प्रतिक्रिया

रूस ने अमेरिकी कार्रवाई की सख्त शब्दों में आलोचना की है। रूस के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। रूस ने मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने की मांग की है। रूसी विदेश मंत्रालय का कहना है कि किसी भी देश के बीच विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए, न कि सैन्य कार्रवाई और गिरफ्तारी के जरिए। रूस ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ बताया है।

चीन ने बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

चीन ने भी अमेरिका के इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताया है। चीन का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है। चीनी सरकार ने इसे तानाशाही करार देते हुए कहा कि वेनेजुएला एक संप्रभु देश है और उसके राष्ट्रपति को इस तरह खुलेआम गिरफ्तार करना पूरी तरह गलत है। चीन ने चेतावनी दी है कि इस तरह की कार्रवाइयों से वैश्विक स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

अमेरिका के समर्थन में कौन-कौन आया

जहां कई देश अमेरिका के खिलाफ खड़े नजर आए, वहीं कुछ देशों और प्रभावशाली हस्तियों ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम का समर्थन भी किया है। अर्जेंटीना और इक्वाडोर ने खुलकर अमेरिकी कार्रवाई को सही ठहराया है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आजादी की जीत है। उनके बयान को अमेरिका के प्रति मजबूत समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

इक्वाडोर और एलन मस्क का बयान

इक्वाडोर के राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ ने भी अमेरिका के कदम का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि नार्कोचाविस्टा अपराधियों का साम्राज्य अब ढहने वाला है। वहीं टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि यह पूरी दुनिया की जीत है। उन्होंने इसे तानाशाहों के लिए एक साफ संदेश बताया। एलन मस्क की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक दायरे से निकलकर वैश्विक बहस का विषय बन गया है।

इटली की प्रधानमंत्री की संतुलित प्रतिक्रिया

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अमेरिका की कार्रवाई पर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह वेनेजुएला में हो रहे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इटली ने कभी मादुरो की चुनावी जीत को मान्यता नहीं दी और उनके शासन के दौरान हुए गलत कामों की आलोचना करता रहा है। 

हालांकि मेलोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी समस्या का समाधान सैन्य कार्रवाई से करना सही रास्ता नहीं है। उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि अगर किसी देश की सुरक्षा खतरे में हो, तो हाइब्रिड हमलों को वैध ठहराया जा सकता है। उनके बयान में सुरक्षा और कूटनीति के बीच संतुलन की झलक देखने को मिली।

ब्राजील ने बताया संप्रभुता पर हमला

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिका की इस कार्रवाई को गलत ठहराया है। उनका कहना है कि यह वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला है। लूला ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव भी रखा है। ब्राजील का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से पूरे लैटिन अमेरिका में अस्थिरता बढ़ सकती है।

यूरोपियन यूनियन की अपील

यूरोपियन यूनियन ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने अमेरिका और वेनेजुएला दोनों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करना चाहिए। ईयू का मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से ही निकाला जाना चाहिए।

क्या है ब्रिटेन का रुख

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ किया है कि अमेरिका की इस कार्रवाई में ब्रिटेन की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ब्रिटेन मादुरो को एक अवैध राष्ट्रपति मानता रहा है और वेनेजुएला में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण की जरूरत है। ब्रिटेन का यह बयान अमेरिका से दूरी बनाए रखने और साथ ही मादुरो शासन के प्रति अपने पुराने रुख को दोहराने जैसा माना जा रहा है।

फ्रांस की चिंता और अपील

फ्रांस के राष्ट्रपति एंथनी अल्बनीज ने कहा कि फ्रांस लंबे समय से वेनेजुएला की स्थिति को लेकर चिंतित रहा है। उन्होंने भी अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दिया और दोनों पक्षों से क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की अपील की। फ्रांस का कहना है कि इस तरह के हालात में किसी भी कदम से पहले वैश्विक असर को ध्यान में रखना जरूरी है।

दुनिया दो धड़ों में क्यों बंटी

इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ वे देश और नेता हैं जो इसे तानाशाही के खिलाफ निर्णायक कदम मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे देश हैं जो इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन बता रहे हैं। यह विभाजन आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

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