महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जाली जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए अहम कदम उठाया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि आधार कार्ड के आधार पर जारी सभी संदिग्ध प्रमाणपत्र तुरंत रद्द किए जाएं और संबंधित मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों के बढ़ते रैकेट के खिलाफ अब निर्णायक कदम उठाया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के निर्देश पर राज्य के 14 संवेदनशील जिलों में विशेष क्लीन-अप अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत संदिग्ध और जाली प्रमाणपत्रों को रद्द करने, दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने और पूरे सिस्टम की गहन जांच के आदेश दिए गए हैं।
सरकार का यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब यह सामने आया है कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, जमीन हड़पने, पहचान बदलने और यहां तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी किया जा रहा है।
16-सूत्रीय सत्यापन गाइडलाइन जारी
राजस्व विभाग ने इस पूरे मामले में एक 16-सूत्रीय विस्तृत सत्यापन मार्गदर्शिका जारी की है, जिसे सभी तहसीलदारों, उप-विभागीय अधिकारियों (SDO), जिलाधिकारियों और संभागीय आयुक्तों को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस सर्कुलर में साफ किया गया है कि, आधार कार्ड को जन्मतिथि या जन्मस्थान का एकमात्र प्रमाण नहीं माना जा सकता। यह निर्देश केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप है।
सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में केवल आधार कार्ड के आधार पर बड़ी संख्या में जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिनमें गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
किन प्रमाणपत्रों को किया जाएगा रद्द?
सरकार के आदेश के अनुसार:
- 11 अगस्त 2023 के संशोधन के बाद नायब तहसीलदारों द्वारा जारी सभी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र अस्थायी रूप से वापस लेकर रद्द किए जाएंगे।
- केवल आधार कार्ड के आधार पर जारी किए गए सभी प्रमाणपत्र अवैध माने जाएंगे और तुरंत निरस्त किए जाएंगे।
- यदि आवेदन पत्र और आधार में दर्ज जन्मतिथि में कोई भी अंतर पाया जाता है, तो तत्काल आपराधिक मामला (FIR) दर्ज किया जाएगा।
फर्जी प्रमाणपत्र लेकर फरार व्यक्ति को “फ्यूजिटिव” (भगोड़ा) घोषित कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

14 संवेदनशील जिले विशेष निगरानी में
सरकार ने जिन 14 जिलों को सबसे अधिक संवेदनशील माना है, उनमें शामिल हैं: अमरावती, अकोला, सिल्लोड, संभाजीनगर शहर, लातूर, अंजनगांव सुर्जी, अचलपुर, पुसेद, परभणी, बीड, गेवराई, जालना, अर्धापुर और परली। इन सभी जिलों में विशेष सत्यापन शिविर लगाए जाएंगे और जिलाधिकारी व संभागीय आयुक्त स्वयं पूरे ऑपरेशन की निगरानी करेंगे राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
'फर्जी जन्म–मृत्यु प्रमाणपत्रों का प्रयोग आज सिर्फ धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका उपयोग सरकारी योजनाओं में घुसपैठ, जमीन पर अवैध कब्जे और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी किया जा रहा है। ऐसे रैकेट किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।'
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में आती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
कैसे चलेगा क्लीन-अप ऑपरेशन?
सरकार की रणनीति के तहत:
- हर जिले में विशेष जांच टीमें गठित की जाएंगी।
- पुराने रिकॉर्ड का डिजिटल और भौतिक दोनों स्तरों पर सत्यापन किया जाएगा।
- नागरिकों से अपील की जाएगी कि वे स्वयं अपने प्रमाणपत्र की जांच कराएं।
- संदिग्ध मामलों में पुलिस, साइबर सेल और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार का दावा है कि यह अभियान केवल कागजी कार्रवाई नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यापक सफाई अभियान के रूप में लागू किया जाएगा।









