मिस्सी रोटी उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और राजस्थान की एक बहुत ही लोकप्रिय और पारंपरिक रोटी है। यह गेहूं के आटे और बेसन (चने का आटा) को मिलाकर बनाई जाती है। इसका स्वाद सोंधा और बनावट थोड़ी कुरकुरी होती है। इसमें अजवाइन, कटी हुई प्याज और कसूरी मेथी का खास इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे सादी रोटी के मुकाबले ज्यादा जायकेदार और खुशबूदार बनाता है।
सामग्री
- बेसन: 1 कप
- गेहूं का आटा: 1 कप
- प्याज: 1 मध्यम (बारीक कटा हुआ)
- हरी मिर्च: 1-2 (बारीक कटी हुई)
- कसूरी मेथी: 1 बड़ा चम्मच (हाथ से मसली हुई)
- अजवाइन: ½ छोटा चम्मच
- मसाले: हल्दी पाउडर (½ छोटा चम्मच), लाल मिर्च पाउडर, नमक (स्वादानुसार)।
- घी/तेल: आटा गूंथने के लिए (मोयन) और सेकने के लिए।
- हरा धनिया: बारीक कटा हुआ (वैकल्पिक)।
बनाने का तरीका
- आटा लगाना: एक बड़े बर्तन में बेसन और गेहूं का आटा छान लें। इसमें कटा हुआ प्याज, हरी मिर्च, कसूरी मेथी, अजवाइन, नमक, हल्दी, लाल मिर्च, हरा धनिया और एक चम्मच घी/तेल डालें।
- गूंथना: सभी चीजों को अच्छे से मिलाएं। अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए न ज्यादा सख्त और न ज्यादा नरम आटा गूंथ लें।
- रेस्ट: आटे को ढककर 10-15 मिनट के लिए रख दें ताकि वह सेट हो जाए।
- बेलना: आटे की लोई (pedas) बनाएं। मिस्सी रोटी सामान्य रोटी से थोड़ी मोटी बेली जाती है, ताकि वह सूखकर पापड़ न बने।
- सेकना: तवे को मध्यम आंच पर गरम करें। रोटी डालें और दोनों तरफ से सुनहरा भूरा होने तक सेकें। आप इसे तवे पर घी लगाकर परांठे की तरह भी सेक सकते हैं या सीधे आंच पर फुल्के की तरह भी पका सकते हैं। पकने के बाद ऊपर से खूब सारा घी या मक्खन लगाएं।
परोसने के तरीके
- मिस्सी रोटी का असली मजा सफेद मक्खन (White Butter) या देसी घी के साथ आता है।
- इसे गाढ़े दही या लस्सी के साथ परोसें।
- इसके साथ आम का अचार या लहसुन की चटनी बहुत अच्छी लगती है।
- सब्जी के तौर पर यह सेव टमाटर, दाल मखनी या कढ़ी के साथ सबसे अच्छी लगती है।
खाने के फायदे
मिस्सी रोटी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसमें बेसन होने से यह प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत बन जाती है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो इसे डायबिटीज के मरीजों के लिए एक उत्तम विकल्प बनाता है। इसमें डाली गई अजवाइन पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है और पेट में गैस की समस्या नहीं होने देती। साथ ही, यह फाइबर से भरपूर होती है जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और शरीर को निरंतर ऊर्जा मिलती है।













