मनरेगा से कांग्रेस को मिली उम्मीद, VB-G RAM G नामकरण पर देशव्यापी आंदोलन की तैयारी तेज

मनरेगा से कांग्रेस को मिली उम्मीद, VB-G RAM G नामकरण पर देशव्यापी आंदोलन की तैयारी तेज

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्वरूप में बदलाव कर इसे नए नाम VB-G RAM G (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) के तहत आगे बढ़ाने की कोशिश ने सियासी बहस को तेज कर दिया है।

नई दिल्ली: भारत में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के नाम और स्वरूप में बदलाव के प्रस्ताव ने सियासी बहस को तेज कर दिया है। केंद्र सरकार द्वारा इसे VB-G RAM G (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) के नाम से आगे बढ़ाने की कोशिश को कांग्रेस ने ग्रामीण गरीबों की जीवन रेखा पर हमला बताते हुए देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी इसे ग्रामीण भारत में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का एक अवसर मान रही है।

कांग्रेस का आरोप: मनरेगा की आत्मा पर हमला

कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण गरीबों, विशेषकर अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए जीवन रेखा रही है। पार्टी का आरोप है कि VB-G RAM G जैसे नए ढांचे में रोजगार की कानूनी गारंटी, मजदूरी भुगतान की समयबद्धता और जरूरतों के अनुरूप काम देने की प्रतिबद्धता कमजोर हो सकती है।

कांग्रेस इसे सीधे जनता की रोजी-रोटी से जुड़े मुद्दे के रूप में देख रही है। पार्टी इस बात को भुनाने की कोशिश कर रही है कि अगर योजना की मूल भावना को बदल दिया गया तो ग्रामीण गरीब वर्ग के अधिकारों पर असर पड़ेगा।

देशव्यापी आंदोलन की रणनीति

कांग्रेस ने पंचायत से संसद तक डेढ़ महीने का व्यापक कार्यक्रम तैयार किया है। इसके तहत पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पत्र व्यक्तिगत रूप से ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा मजदूरों तक पहुंचाए जाएंगे। पार्टी ने हाल के वर्षों में वोट चोरी, SIR जैसे मुद्दों पर अभियान चलाया था, लेकिन उसका जमीनी असर सीमित रहा। बिहार विधानसभा चुनावों में हार के बाद यह स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस को ऐसे मुद्दे चाहिए जो सीधे जनता के जीवन और रोजी-रोटी से जुड़े हों, और इस कसौटी पर मनरेगा सर्वोत्तम विकल्प साबित होता है।

इतिहास इस बात का गवाह है कि 2009 में केंद्र में कांग्रेस की वापसी में मनरेगा की निर्णायक भूमिका थी। अब पार्टी उसी सामाजिक आधार को पुनः सक्रिय करना चाहती है। खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां कांग्रेस लंबे समय से कमजोर रही है, मनरेगा के माध्यम से नए सिरे से राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस का मानना है कि अगर विभिन्न वर्गों को एकजुट किया गया तो यह आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है। पार्टी सरकार पर भी दबाव डालना चाहती है कि वह योजना की मूल भावना से छेड़छाड़ न करे।

Leave a comment