ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया ने छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी विवादित सामग्री के लिए सार्वजनिक माफी मांगी। प्रेस ने कहा कि कुछ पृष्ठों पर लिखे दावे सत्यापित नहीं हुए और भविष्य में सटीकता सुनिश्चित की जाएगी।
Maharashtra: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (OUP) इंडिया ने छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी आपत्तिजनक और अपुष्ट सामग्री को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। यह कदम उस विवादित किताब के 21 साल बाद उठाया गया है, जिसमें महाराज के बारे में कथित आपत्तिजनक दावे शामिल थे। प्रेस ने इस संबंध में बॉम्बे हाई कोर्ट में हलफनामा भी दाखिल किया है।
क्या है विवाद का इतिहास
वर्ष 2003 में जेम्स लेन द्वारा लिखी गई किताब "Shivaji: Hindu King in Islamic India" में छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में कुछ ऐसे दावे प्रकाशित किए गए थे, जिन्हें बाद में सत्यापन की कसौटी पर खरा नहीं पाया गया। यह सामग्री सार्वजनिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विवादास्पद मानी गई। वर्ष 2004 में इस किताब को लेकर विवाद तब और गहराया, जब संभाजी ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने पुणे स्थित भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट में तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि संस्थान ने लेखक को शोध में सहयोग दिया था और किताब में शिवाजी महाराज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की माफी

OUP इंडिया ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर कहा कि किताब के पृष्ठ 31, 33, 34 और 93 पर लिखी गई कुछ सामग्री सत्यापन की कसौटी पर खरे नहीं उतरी। प्रेस ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि इन दावों को प्रकाशित करने पर उन्हें खेद है। नोटिस में स्पष्ट किया गया कि माफी छत्रपति शिवाजी महाराज के 13वें वंशज उदयनराजे भोसले के साथ-साथ आम जनता से भी मांगी गई है।
सटीकता और संवेदनशीलता का महत्व
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने अपने नोटिस में यह दोहराया कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से जुड़े तथ्यों को प्रस्तुत करते समय सटीकता और संवेदनशीलता का पालन बेहद जरूरी है। प्रेस ने कहा कि इस मामले में हुई चूक के लिए वह खेद प्रकट करता है और भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने का आश्वासन दिया है।
इतिहासकारों की प्रतिक्रिया
इस माफी की खबर आने के बाद इतिहासकारों और आम जनता में इसे स्वागत की दृष्टि से देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐतिहासिक पुस्तकों और शोध कार्यों में तथ्यों की जांच और प्रमाणिकता का पालन करना आवश्यक है। इस माफी से यह स्पष्ट हुआ कि प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान भी अपनी गलतियों को स्वीकार कर सकता है और सुधार की दिशा में कदम उठा सकता है।
OUP इंडिया ने हलफनामे में स्पष्ट किया कि विवादित सामग्री विशेष रूप से चार पृष्ठों पर मौजूद थी। इनमें छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े तथ्य अपुष्ट पाए गए और उनकी पुख्ता ऐतिहासिक पुष्टि नहीं हो पाई। इस प्रकार की सामग्री ने शाही व्यक्तित्व की भावनाओं को आहत किया और ऐतिहासिक दृष्टि से गलत धारणाएं फैलने का खतरा पैदा किया।












