IITs काउंसिल ने इंजीनियरिंग शिक्षा में बड़े बदलावों की दिशा तय की है। M.Tech प्रोग्राम्स में इंडस्ट्री इंटर्नशिप अनिवार्य करने, B.Tech का सिलेबस AI आधारित बनाने और PhD को नवाचार व वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जोड़ने की सिफारिश की गई है, ताकि छात्रों को बेहतर करियर और शोध अवसर मिल सकें।
IITs इंजीनियरिंग सिलेबस बदलाव: IITs काउंसिल ने अगस्त 2025 में हुई बैठक में देश की इंजीनियरिंग शिक्षा को नए दौर के अनुरूप ढालने का फैसला लिया है। यह निर्णय सभी 23 IITs के लिए है और इसका उद्देश्य B.Tech के बाद M.Tech से घटती रुचि, बदलती तकनीक और इंडस्ट्री की मांगों को ध्यान में रखना है। बैठक में तय किया गया कि M.Tech में इंटर्नशिप अनिवार्य होगी, B.Tech का सिलेबस AI और उभरती तकनीकों पर आधारित होगा और PhD प्रोग्राम्स को नवाचार व इंडस्ट्री से जोड़कर मजबूत किया जाएगा, ताकि छात्र भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
M.Tech में इंटर्नशिप अनिवार्य
IITs काउंसिल ने M.Tech प्रोग्राम्स के करिकुलम में बदलाव की सिफारिश की है, जिसके तहत छात्रों के लिए इंडस्ट्री इंटर्नशिप को अनिवार्य किया जाएगा। बैठक में यह चिंता जताई गई कि B.Tech के बाद छात्र M.Tech करने से दूरी बना रहे हैं, जिसकी बड़ी वजह सीमित स्पेशलाइजेशन और इंडस्ट्री से कम जुड़ाव माना गया।
नए बदलावों का उद्देश्य M.Tech को ज्यादा प्रैक्टिकल और करियर-फोकस्ड बनाना है। अनिवार्य इंटर्नशिप से छात्रों को वास्तविक इंडस्ट्री अनुभव मिलेगा, जिससे रिसर्च और जॉब दोनों के मौके बेहतर हो सकेंगे। यह बदलाव सभी 23 IITs में लागू करने की योजना है।

AI के अनुसार बदलेगा B.Tech का सिलेबस
IITs काउंसिल की बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर भी गंभीर चर्चा हुई। परिषद ने सिफारिश की है कि आने वाले 2–3 वर्षों में B.Tech प्रोग्राम्स का सिलेबस AI और उभरती तकनीकों के हिसाब से दोबारा तैयार किया जाए।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इंजीनियरिंग छात्र केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें डेटा, AI टूल्स और नई तकनीकी सोच के साथ तैयार किया जाए। इससे भविष्य की नौकरियों और ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में भारतीय छात्रों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।
PhD प्रोग्राम्स को मिलेगा नया फोकस
बैठक में तकनीकी विषयों में PhD प्रोग्राम्स पर भी अहम फैसले लिए गए। IITs काउंसिल ने तय किया है कि PhD को नवाचार, नेतृत्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का मजबूत आधार बनाया जाएगा।
इसके तहत रिसर्च को ज्यादा इंडस्ट्री-लिंक्ड, समस्या-समाधान आधारित और अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने पर जोर दिया जाएगा। उद्देश्य यह है कि IITs से निकलने वाला शोध न सिर्फ अकादमिक रहे, बल्कि देश की तकनीकी और औद्योगिक जरूरतों को भी पूरा करे।











