मुंबई राजनीति में हलचल, BMC चुनाव से पहले कांग्रेस से 12 पार्षद बाहर

मुंबई राजनीति में हलचल, BMC चुनाव से पहले कांग्रेस से 12 पार्षद बाहर

BMC चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी से निलंबित 12 पार्षदों ने बीजेपी जॉइन कर ली है। इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में अहम बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

Mumbai: महाराष्ट्र में आगामी नगर निगम चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से बदलता नजर आ रहा है। खासकर मुंबई महानगरपालिका यानी BMC चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस के 12 निलंबित पार्षदों ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर सियासी समीकरण बदल दिए हैं। इस घटनाक्रम को राज्य की राजनीति में अहम मोड़ माना जा रहा है।

बीजेपी में शामिल हुए 12 पार्षद

कांग्रेस से निलंबित सभी 12 पार्षद औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। इन नेताओं को महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर पार्टी नेताओं की मौजूदगी में संगठन को मजबूत करने का संदेश भी दिया गया। बीजेपी के लिए यह शामिल होना सिर्फ संख्या का खेल नहीं बल्कि रणनीतिक बढ़त भी माना जा रहा है।

रवींद्र चव्हाण का बयान

पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि भाजपा परिवार की विकासोन्मुखी और जनहितैषी कार्यशैली से प्रेरित होकर कई नेता पार्टी से जुड़े हैं। उन्होंने इसे विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने का फैसला बताया।

कल्याण डोंबिवली की सियासी तस्वीर

रवींद्र चव्हाण ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि इस मौके पर कल्याण डोंबिवली नगर निगम की स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष और निर्विरोध भाजपा उम्मीदवार दीपेश म्हात्रे सहित कई प्रमुख नेता मौजूद थे। जयेश म्हात्रे, हर्षदताई भोईर जैसे स्थानीय नेता भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बने। इससे साफ है कि बीजेपी जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

कांग्रेस से निलंबन की वजह

इन 12 पार्षदों को कांग्रेस ने पहले ही निलंबित कर दिया था। ठाणे जिले के अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव के दौरान इन नेताओं ने कांग्रेस लाइन से हटकर बीजेपी के साथ मिलकर अलग मोर्चा बनाया था। इसी वजह से पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए इन्हें निलंबित कर दिया था।

अंबरनाथ विकास अघाड़ी की भूमिका

अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव के दौरान इन पार्षदों ने बीजेपी के साथ मिलकर अंबरनाथ विकास अघाड़ी यानी AVA नाम से एक राजनीतिक गठबंधन बनाया था। इस गठबंधन ने स्थानीय राजनीति में बड़ा असर डाला और सत्ता के समीकरण बदल दिए। यही गठबंधन बाद में कांग्रेस नेतृत्व के लिए असहज स्थिति का कारण बना।

अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव नतीजे

अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में शिंदे गुट की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 27 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत से चार सीट पीछे रह गई। बहुमत का आंकड़ा 30 था, जिसे शिवसेना अकेले पार नहीं कर पाई।

बीजेपी कांग्रेस एनसीपी का गणित

इस चुनाव में बीजेपी ने 14 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 12 और एनसीपी को 4 सीटें मिलीं। परिणाम आने के बाद राजनीतिक जोड़तोड़ तेज हो गई। बीजेपी ने मौके का फायदा उठाते हुए कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सत्ता की नई रणनीति बनाई।

बीजेपी की रणनीतिक चाल

बीजेपी ने सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने की रणनीति अपनाई। कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर अंबरनाथ विकास अघाड़ी का गठन किया गया। इसके साथ एक निर्दलीय पार्षद को भी समर्थन में लिया गया।

बहुमत का आंकड़ा पार

कांग्रेस, बीजेपी, एनसीपी और निर्दलीय पार्षद को मिलाकर कुल संख्या 32 तक पहुंच गई। यह संख्या बहुमत के आंकड़े 30 से ज्यादा थी। इस तरह अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल गया। यही घटनाक्रम आगे चलकर कांग्रेस के लिए अंदरूनी संकट का कारण बना। 

BMC चुनाव से पहले कांग्रेस के 12 पार्षदों का बीजेपी में जाना केवल एक दल बदल की घटना नहीं है। इसे महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में बदलते रुझान के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसकी विकास आधारित राजनीति से नेता प्रभावित हो रहे हैं।

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