कोटा जिले के सांगोद विधानसभा क्षेत्र में पंचायतों के पुनर्गठन ने ग्रामीणों के बीच नई उम्मीदें जगा दी हैं। नवगठित 22 ग्राम पंचायतों के निवासियों ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए राजस्थान सरकार और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के प्रति आभार व्यक्त किया।
Rajasthan: पंचायत समिति परिसर में प्रधान जयवीर सिंह अमृतकुआं और उप प्रधान ओम नागर अडूसा के नेतृत्व में नागरिकों ने ऊर्जा मंत्री का अभिनंदन किया। हीरालाल नागर ने कहा कि पुनर्गठन ग्रामीण प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे छोटे गांवों के लोगों को अपने पंचायत मुख्यालय तक पहुंचना आसान होगा और दस्तावेजी कार्यों में भी सुगमता आएगी।
भजनलाल सरकार का बड़ा सुधार
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्रामीण प्रशासन को मजबूत बनाने के लक्ष्य के साथ पुनर्गठन की योजना बनाई है। उन्होंने बताया कि नई संरचना गांवों की भौगोलिक दूरी को कम करेगी, जिससे आमजन को राहत मिलेगी और सरकारी सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
मंत्री नागर ने बताया कि गांवों के नागरिक अब अपनी समस्याओं का समाधान नजदीक ही प्राप्त कर सकेंगे। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि पंचायतों की कार्यक्षमता और पारदर्शिता में भी वृद्धि होगी।
‘एक राज्य, एक चुनाव’ की दिशा में बड़ा कदम
हीरालाल नागर ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने सभी पंचायती राज संस्थाओं के लिए एक ही समय पर चुनाव कराने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि यह ‘एक राज्य, एक चुनाव’ नीति की दिशा में बड़ा और निर्णायक कदम है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था सरल और अधिक प्रभावी होगी।
उन्होंने बताया कि एक साथ चुनाव होने से खर्च कम होगा और प्रशासनिक प्रक्रियाएं सुव्यवस्थित होंगी। ग्रामीण स्तर पर भी बेहतर प्रबंधन संभव होगा और विकास कार्य निर्बाध रूप से चल सकेंगे।
निकाय चुनाव और SIR प्रक्रिया में सहयोग की अपील
ऊर्जा मंत्री नागर ने कहा कि आने वाले दिनों में पंचायत और नगर निकायों के चुनाव होंगे, जो स्थानीय स्वशासन को और मजबूत करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और नागरिकों से अपील की कि वे चुनाव आयोग द्वारा की जा रही SIR (Social Impact Report) प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग दें।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है और इसमें जनता की सहभागिता सुरक्षित लोकतंत्र का आधार बनेगी।
ग्रामीण प्रशासन को मिलेगी नई दिशा
हीरालाल नागर ने भरोसा जताया कि पंचायतों के पुनर्गठन से विकास की गति और तेज होगी। गांवों में सरकारी योजनाओं की पहुंच आसान होगी, जनप्रतिनिधियों का सीधा संवाद बढ़ेगा और शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत होगी।












