अमेरिकी दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए अमेरिका में करोड़ों की लॉबिंग की। 60 से ज्यादा बैठकें की गईं और ट्रंप प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश हुई।
Pakistan: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों से एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। इन दस्तावेजों के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारत की सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए अमेरिका पर जबरदस्त दबाव बनाया था। जम्मू कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद से लेकर ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से पहले और भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले तनाव के दौरान पाकिस्तान लगातार अमेरिकी प्रशासन, सांसदों और मीडिया के संपर्क में रहा। मकसद साफ था, भारत के खिलाफ माहौल बनाना और अमेरिकी दखल से भारतीय कार्रवाई को रुकवाना।
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान की बेचैनी
पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने सख्त रुख अपनाया और ऑपरेशन सिंदूर की तैयारी शुरू की, उसी वक्त पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई। अमेरिकी दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे दौर में पाकिस्तान ने कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर अमेरिका को अपने पक्ष में करने की हरसंभव कोशिश की। पाकिस्तान को डर था कि अगर भारत ने खुलकर सैन्य कार्रवाई की तो उसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बचाव मुश्किल हो जाएगा।

60 से ज्यादा बैठकों का रिकॉर्ड
अमेरिकी विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के रिकॉर्ड में यह साफ दर्ज है कि अमेरिका में तैनात पाकिस्तानी उच्चायुक्त और अन्य राजनयिकों ने 60 से ज्यादा बैठकों के लिए प्रयास किए। इनमें ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने की मीटिंग शामिल थीं। इन बैठकों का उद्देश्य अमेरिकी सरकार और प्रभावशाली लोगों पर भारत के खिलाफ दबाव बनाना था। ऑपरेशन सिंदूर की मार झेल रहे पाकिस्तान ने इस दौरान अमेरिका के सामने लगभग गिड़गिड़ाने जैसी स्थिति अपना ली थी।
मीडिया से संपर्क
पाकिस्तान ने केवल अमेरिकी सांसदों तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि पेंटागन (Pentagon), अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट और बड़े मीडिया हाउस तक पहुंचने की कोशिश की। इन बैठकों और संपर्कों में कश्मीर मुद्दे, क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा पर हालात, भारत-पाक संबंध और यहां तक कि रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) जैसे विषयों को भी उठाया गया। पाकिस्तान चाहता था कि इन मुद्दों को उछालकर भारत की सैन्य कार्रवाई को आक्रामक और अस्थिर बताया जाए।
कंगाल अर्थव्यवस्था, लेकिन लॉबिंग पर करोड़ों खर्च

एक तरफ पाकिस्तान खुद गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में लॉबिंग के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहा था। नवंबर 2025 में प्रकाशित न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने वाशिंगटन की एक बड़ी लॉबिंग फर्म को लगभग 5 मिलियन डॉलर यानी करीब 45 करोड़ रुपये दिए। इस रकम का इस्तेमाल अमेरिकी पॉलिसी मेकर्स और प्रशासन को प्रभावित करने के लिए किया गया।
लॉबिंग फर्म और ट्रंप प्रशासन
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने जेवलिन एडवाइजर्स (Javelin Advisors) के जरिए काम कर रही सेडेन लॉ एलएलपी (Seddon Law LLP) के साथ करार किया था। इस डील के कुछ ही हफ्तों बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर का स्वागत किया। इस मुलाकात को पाकिस्तान की लॉबिंग रणनीति की बड़ी सफलता के तौर पर देखा गया।
ट्रंप को खुश करने की हर कोशिश
पाकिस्तान ने ट्रंप को खुश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) के लिए नामित करने की बात तक कही। इसके अलावा व्यापार, बिजनेस और निवेश से जुड़े कई लालच भी दिए गए। पाकिस्तान की कोशिश थी कि किसी भी तरह ट्रंप प्रशासन भारत पर दबाव बनाए और ऑपरेशन सिंदूर को रोका जाए।










