रूसी तेल को लेकर भारत की भूमिका पर अमेरिका की प्रतिक्रिया, ट्रंप के मंत्री बोले- भारतीय अच्छे एक्टर रहे

रूसी तेल को लेकर भारत की भूमिका पर अमेरिका की प्रतिक्रिया, ट्रंप के मंत्री बोले- भारतीय अच्छे एक्टर रहे

Scott Bessent ने कहा कि India ने रूसी तेल प्रतिबंधों के मामले में सहयोग किया है। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए United States कुछ रूसी तेल प्रतिबंधों में ढील पर विचार कर सकता है।

America: रूस से तेल खरीद को लेकर वैश्विक राजनीति के बीच अमेरिका ने भारत की भूमिका पर सकारात्मक टिप्पणी की है। अमेरिकी वित्तीय मंत्री Scott Bessent ने कहा कि रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों के मामले में भारत ने अच्छा सहयोग किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए अमेरिका कुछ रूसी कच्चे तेल (Russian Crude Oil) पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर सकता है।

‘भारतीय अच्छे एक्टर रहे हैं’ बयान की चर्चा

स्कॉट बेसेंट ने Fox Business के कार्यक्रम में बातचीत के दौरान भारत की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीयों ने स्थिति को संभालने में अच्छा सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत से इस शरद ऋतु में प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदना बंद करने का अनुरोध किया था और भारत ने उस अनुरोध का पालन किया।

उन्होंने यह भी बताया कि नई दिल्ली ने अमेरिका के कई पुराने अनुरोधों को भी मानते हुए सहयोग किया था। इसी संदर्भ में उनके “भारतीय अच्छे एक्टर रहे हैं” जैसे बयान की चर्चा शुरू हो गई, जिसे कई विश्लेषक भारत की कूटनीतिक संतुलन नीति की तारीफ के रूप में देख रहे हैं।

समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति

अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने भारत को समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दी थी। बेसेंट के अनुसार कई जहाजों में पहले से लदा रूसी कच्चा तेल समुद्र में मौजूद था और यदि उसे नहीं खरीदा जाता तो वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ सकता था।

इसी वजह से वाशिंगटन ने भारत को उस तेल को खरीदने की अनुमति दी। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि दुनिया भर में तेल की सप्लाई में अचानक कमी न आए और बाजार में अस्थिरता पैदा न हो।

अमेरिकी तेल से आपूर्ति बदलने की योजना

बेसेंट ने बताया कि भारत शुरू में रूसी तेल की जगह अमेरिकी तेल का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा था। लेकिन उस समय वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही थी।

ऐसे में अमेरिका ने स्थिति को देखते हुए अस्थायी तौर पर भारत को रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दे दी। इस कदम का उद्देश्य यह था कि दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो और तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल न आए।

रूस प्रतिबंधों में ढील के संकेत

बातचीत के दौरान स्कॉट बेसेंट ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका रूस के अतिरिक्त तेल पर लगे प्रतिबंधों में कुछ राहत दे सकता है। उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए जरूरी हुआ तो वाशिंगटन और कदम उठा सकता है।

उन्होंने कार्यक्रम के मेजबान Larry Kudlow से बातचीत में कहा कि अमेरिका अन्य रूसी तेल शिपमेंट पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर भी विचार कर सकता है।

इस बयान को वैश्विक ऊर्जा बाजार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका ऊर्जा संकट से बचने के लिए लचीला रुख अपना सकता है।

ईरान तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता

दुनिया भर में तेल बाजार पर इस समय मध्य पूर्व के हालात का भी बड़ा असर पड़ रहा है। Iran से जुड़े तनावों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर बना दिया है।

मध्य पूर्व में संभावित आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण कई देशों में तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। यदि इस क्षेत्र से तेल की सप्लाई प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।

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