फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने देशभर के फार्मासिस्ट्स के लिए बड़ा सुधार कदम उठाते हुए ‘फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा विनियम–2025’ का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। अंतिम मंजूरी के बाद देश में पहली बार फार्मासिस्ट्स का स्वतंत्र कैडर बनेगा, जिससे राजस्थान के लगभग 5,000 सरकारी फार्मासिस्ट्स को सीधा लाभ मिलेगा।
नई दिल्ली: फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने देश में फार्मासिस्ट्स की सेवा संरचना को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। PCI की 120वीं केंद्रीय परिषद बैठकों में ‘फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा विनियम–2025’ के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई है। इस ड्राफ्ट को अब सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजकर तीन माह के भीतर सुझाव मांगे गए हैं।
अंतिम सहमति के बाद देश में पहली बार फार्मासिस्ट्स के लिए स्वतंत्र कैडर का गठन होगा, जिससे उनकी भूमिका, जिम्मेदारियां और कैरियर ग्रोथ स्पष्ट रूप से परिभाषित हो सकेगी। इस कदम का सबसे बड़ा लाभ राजस्थान जैसे राज्यों को मिलेगा, जहां करीब 5,000 सरकारी अस्पतालों में तैनात फार्मासिस्ट्स लंबे समय से स्वतंत्र कैडर की मांग कर रहे थे। नया ढांचा स्वास्थ्य सेवाओं में फार्मासिस्ट्स की अहमियत बढ़ाएगा और उनके पदोन्नति मार्ग को भी सुगम बनाएगा।
फार्मासिस्ट्स का नया पदनाम ‘फार्मेसी ऑफिसर’
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने सेवा संरचना में बड़ा बदलाव प्रस्तावित करते हुए फार्मासिस्ट्स का नया पदनाम ‘फार्मेसी ऑफिसर’ तय किया है। ड्राफ्ट ‘फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा विनियम–2025’ के अनुसार अब उनकी जिम्मेदारियों, पदोन्नति मार्ग और प्रशिक्षण प्रणाली को स्पष्ट व मानकीकृत किया जाएगा। नियमन में फार्मेसी शिक्षा, पंजीकरण, सरकारी सेवा में नियुक्ति और प्रमोशन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश शामिल हैं। अंतिम मंजूरी के बाद देशभर के सरकारी अस्पतालों में तैनात फार्मेसी कर्मियों को मजबूत कैडर और स्पष्ट करियर प्रगति का लाभ मिलेगा।
बढ़ेगी हेल्थ सर्विस क्वालिटी
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया का मानना है कि फार्मासिस्ट देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम स्तंभ हैं, इसलिए इनके लिए एक समान कैडर तैयार होना अनिवार्य है। काउंसिल ने सभी राज्यों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि統 यूनिफॉर्म कैडर लागू होने से सेवा गुणवत्ता का स्तर पूरे देश में एक जैसा होगा और मरीजों को अधिक विश्वसनीय दवा सेवाएं मिल सकेंगी।
राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे 90 दिनों के भीतर प्रस्तावित ड्राफ्ट पर अपने सुझाव और टिप्पणियां भेजें। परिषद इन प्रतिक्रियाओं के आधार पर अंतिम ढांचा तैयार करेगी, जिसके बाद देश में फार्मेसी ऑफिसर्स की नियुक्ति, पदोन्नति और प्रशिक्षण की प्रक्रिया अधिक सुचारु और पारदर्शी होगी।
फार्मासिस्ट्स को बदलाव से सीधा लाभ
राजस्थान में फिलहाल करीब 5,000 नियमित फार्मासिस्ट सरकारी चिकित्सा संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय से वे वेतन संरचना में सुधार और स्पष्ट पदनाम की मांग उठा रहे हैं। प्रस्तावित स्वतंत्र कैडर लागू होने पर इन कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां, बेहतर प्रमोशन अवसर और स्पष्ट करियर पाथ मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण सेन का कहना है कि ग्रेड पे 4200 और ‘फार्मेसी ऑफिसर’ पदनाम की मांग वर्षों से लंबित है, जिसे अब सरकार को प्राथमिकता के साथ लागू करना चाहिए। उनका मानना है कि इससे न सिर्फ कर्मचारियों में संतोष बढ़ेगा, बल्कि दवा वितरण प्रणाली की दक्षता भी मजबूत होगी।










