रिटायर होने के बाद पूर्व CJI बीआर गवई ने उठाया बड़ा कदम, जस्टिस सूर्यकांत के लिए छोड़ी सरकारी कार

रिटायर होने के बाद पूर्व CJI बीआर गवई ने उठाया बड़ा कदम, जस्टिस सूर्यकांत के लिए छोड़ी सरकारी कार

पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने अपने उत्तराधिकारी जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह के बाद ऐसा कदम उठाया है, जिसकी देशभर में सराहना हो रही है। बीआर गवई ने अपने रिटायरमेंट के बाद सीधे उदाहरण पेश किया कि वरिष्ठ न्यायाधीश कैसे सम्मान और शिष्टाचार के साथ पदभार सौंप सकते हैं।

नई दिल्ली: बीआर गवई भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद से रिटायर हो गए हैं। सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के पद की शपथ ली और अपना कार्यभार संभाला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में पद की शपथ दिलाई, जिसमें पीएम मोदी समेत कई अन्य नेता भी उपस्थित थे। 

शपथ ग्रहण समारोह के बाद पूर्व CJI बीआर गवई ने जस्टिस सूर्यकांत के लिए सरकारी कार छोड़ दी और खुद अपने निजी वाहन से रवाना हुए, इस कदम की सभी ने जमकर सराहना की।

बीआर गवई ने क्या किया?

सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के बाद, जहां जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें CJI के रूप में शपथ ली, बीआर गवई ने उनके लिए सरकारी मर्सिडीज-बेंज कार छोड़ दी। इसके बजाय उन्होंने अपने निजी वाहन से वापस जाने का विकल्प चुना। बीआर गवई के इस कदम को न्यायिक शिष्टाचार और उत्तराधिकारी के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। 

उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए सरकारी वाहन का उपयोग सहजता से कर सकें। इस पहल ने अदालतों और न्यायिक संस्थानों में उत्तराधिकारी के प्रति सहयोग और जिम्मेदारी की नई मिसाल कायम की।

जस्टिस सूर्यकांत का शपथ ग्रहण

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में जस्टिस सूर्यकांत को प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। जस्टिस सूर्यकांत 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे। छोटे शहर के वकील से शुरू हुई उनकी यात्रा ने उन्हें देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचाया। उन्होंने 2011 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से कानून में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की और ‘प्रथम श्रेणी में प्रथम’ स्थान हासिल किया।

जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 24 नवंबर 2025 से 9 फरवरी 2027 तक रहेगा। इस दौरान वह लगभग 15 महीने तक भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगे। वह 65 वर्ष की आयु तक इस पद पर रहेंगे, उसके बाद रिटायर होंगे। उनकी नियुक्ति 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी और उसके बाद से ही देश की न्यायपालिका और आम जनता में उनकी भूमिका पर उत्सुकता बनी हुई थी।

बीआर गवई अपने कार्यकाल में न्यायपालिका के सतत सुधार, पारदर्शिता और न्याय के तेज निर्णय के लिए जाने जाते हैं। रिटायर होने के बाद भी उनका यह कदम यह दर्शाता है कि जूनियर और वरिष्ठ न्यायाधीशों के बीच सहयोग और आदरपूर्ण संबंध कितना महत्वपूर्ण है। बीआर गवई का यह कदम सिर्फ शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रणाली में उत्तराधिकारिता की गरिमा और जिम्मेदारी को भी उजागर करता है।

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