मेरठ में रूबी की मां की हत्या और युवती के अपहरण के मामले में पुलिस ने आरोपी युवक पारस सोम और रूबी को सहारनपुर से गिरफ्तार किया। प्रेम संबंध और शादी तय होने की वजह से दोनों ने घर छोड़ने की योजना बनाई थी।
Uttar pradesh: गुरुवार को कपसाड़ गांव की रूबी अपनी मां सुनीता के साथ खेत की ओर जा रही थी। रास्ते में पारस सोम ने उसे रोक लिया। आरोप है कि मां ने इसका विरोध किया, तो पारस ने गाली-गलौज के बाद फरसे से हमला कर मां की हत्या कर दी और रूबी को अगवा कर लिया। इस घटना के बाद पूरे गांव में तनाव फैल गया। परिवार ने मां का अंतिम संस्कार कराने से पहले कई शर्तें रखीं, जिसके बाद 30 घंटे के बाद अंतिम संस्कार संभव हो सका।
रूबी और पारस का प्रेम संबंध तीन साल पुराना था। दोनों ने परिवार द्वारा तय की गई शादी से बचने और साथ रहने के लिए घर छोड़ने का प्लान बनाया।
भागने की योजना
हत्याकांड के बाद पारस पहले रूबी को लेकर खतौली गया। वहां रूबी को अपनी मां की मौत की खबर मिली। इसके बाद दोनों दिल्ली पहुंचे और एक होटल में रात बिताई। 9 जनवरी को पारस अपनी एक दोस्त के पास गुरुग्राम गया। गांव का माहौल बिगड़ते देख दोनों ने गुरुग्राम से ट्रेन लेकर सहारनपुर की ओर रुख किया।
सहारनपुर के टपरी गांव में पारस की बहन के घर उन्होंने रात बिताई। 10 जनवरी को हरिद्वार जाने के लिए ट्रेन में बैठे थे, तभी उन्होंने झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र के फोन से अपने परिवार की जानकारी ली। यह कॉल पुलिस की नजर में आया और हरिद्वार में रुड़की रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। मेरठ पुलिस ने देर रात दोनों को मेरठ लाया।
पुलिस जांच और बयान
पुलिस कस्टडी में पारस ने कबूला कि उन्होंने कॉलेज के दौरान रूबी से तीन साल पहले प्रेम संबंध शुरू किया था। दोनों ने मिलकर घर छोड़ने का फैसला किया क्योंकि परिवार रूबी की शादी कहीं और तय कर चुका था।

पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद करने और पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हुई है। रूबी को महिला पुलिस की कस्टडी में आशा ज्योति केंद्र में रखा गया है। कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने युवती के बयान दर्ज किए जाएंगे। दोनों को हत्या और अपहरण के मामले में आरोपी बनाया जाएगा।
पीड़ित परिवार की चार शर्तें
रूबी दलित परिवार की हैं और पारस राजपूत समाज का होने की वजह से गांव में राजनैतिक माहौल काफी गरम हो गया। सपा विधायक अतुल प्रधान शुक्रवार को गांव पहुंचना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिससे थोड़ी धक्का-मुक्की हुई और वह धरने पर बैठ गए। इसके बाद कई अन्य राजनीतिक नेता भी गांव में पहुंचे।
करीब ढाई घंटे की बातचीत और प्रयास के बाद प्रशासन और पीड़ित परिवार के बीच वार्ता हुई, जिसमें विधायक की मौजूदगी भी रही। इस दौरान परिवार ने अंतिम संस्कार के लिए चार शर्तें रखीं- बेटी को सुरक्षित ढूंढा जाए, 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए, सरकारी नौकरी मिले और शस्त्र लाइसेंस प्रदान किया जाए। प्रशासन और नेताओं ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए लगातार प्रयास किए।
पुलिस की कार्यवाई
पुलिस ने कहा कि यह मामला समाज में सुरक्षा और सतर्कता की आवश्यकता को दिखाता है। युवाओं और परिवारों को चाहिए कि वे किसी भी नए रिश्ते या व्यक्ति पर अंधविश्वास न करें और असामान्य गतिविधियों की तुरंत जानकारी पुलिस को दें।
पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक हस्तक्षेप से यह मामला अब शांत हुआ है, लेकिन जिले में लोगों में भय और चेतावनी का संदेश गया कि ऐसे मामलों में परिवार और प्रशासन का सहयोग कितना महत्वपूर्ण है।










