राजस्थान के श्रीगंगानगर में सैन्य अभ्यास के दौरान इंदिरा गांधी नहर में टैंक डूब गया। दो सैनिकों में एक बाहर निकल सका, जबकि दूसरा फंसकर मौत का शिकार हो गया। रेस्क्यू टीम ने घंटों बाद उसका शव बाहर निकाला।
Sriganganagar: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में मंगलवार सुबह एक सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान बड़ा हादसा हो गया। भारतीय सेना का एक टैंक इंदिरा गांधी नहर को पार करने की ट्रेनिंग के दौरान अचानक पानी में डूब गया। इस दुर्घटना में टैंक में मौजूद दो में से एक जवान की मौत हो गई, जबकि दूसरा किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा।
घटना के तुरंत बाद बचाव अभियान शुरू किया गया, लेकिन फंसे हुए जवान को बचाया नहीं जा सका। कई घंटे की कठिन रेस्क्यू प्रक्रिया के बाद उसका शव बाहर निकाला गया। इस हादसे ने क्षेत्र में चिंता पैदा कर दी है और सेना ने भी कारणों की जांच शुरू कर दी है।
सैन्य अभ्यास का दौरान टैंक दुर्घटना
यह हादसा उस समय हुआ जब सेना नहर पार करने की रूटीन ट्रेनिंग कर रही थी। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य था कि बख्तरबंद गाड़ियां, विशेष रूप से टैंक, विभिन्न जलस्रोतों और मुश्किल इलाकों को कैसे पार करें, इसका अभ्यास हो सके। श्रीगंगानगर का यह इलाका सैन्य अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर आर्मी की फील्ड ट्रेनिंग होती है।
टैंक में दो सैनिक मौजूद थे और दोनों को इस प्रशिक्षण प्रक्रिया के तहत नहर पार करनी थी। जब टैंक नहर के बीचोंबीच पहुंचा, तब अचानक पानी का दबाव बढ़ गया और टैंक तेजी से नीचे धंसने लगा। इस पलभर में हुए बदलाव ने स्थिति को गंभीर बना दिया। एक जवान ने तुरंत बाहर निकलने में सफलता पाई, लेकिन दूसरा जवान अंदर ही फंस गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन की विस्तृत प्रक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही सेना के साथ-साथ पुलिस, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। टैंक भारी होने के कारण नहर में गहराई तक धंस गया था, जिससे रेस्क्यू टीमों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। पानी की तेज धारा और मिट्टी के दबाव ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया।
कई घंटे तक चलने वाले इस ऑपरेशन में गोताखोरों की टीम भी शामिल थी। उन्होंने नहर के भीतर टैंक की स्थिति का पता लगाया और उसके आसपास खुदाई की। राहत कार्यकर्ताओं ने पहले टैंक तक पहुंचने की कोशिश की, फिर धीरे-धीरे उसे आंशिक रूप से ऊपर लाया गया। जब वे टैंक के दरवाजे तक पहुंचे, तब तक जवान की मौत हो चुकी थी। शव को बाहर निकालते समय भी टीमों को बेहद सावधानी बरतनी पड़ी क्योंकि टैंक की स्थिति बेहद अस्थिर थी।
बचाव दल के अधिकारियों के अनुसार, पानी की गहराई, धारा और टैंक का वजन रेस्क्यू को कठिन बना रहे थे। इस हादसे ने सैन्य अभ्यास के दौरान सुरक्षा प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं और उम्मीद है कि जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
पुलिस और आर्मी की प्रारंभिक जांच
पुलिस ने बताया कि यह एक नियमित ट्रेनिंग का हिस्सा था जिसमें बख्तरबंद वाहनों को नहर के आर-पार ले जाने की प्रैक्टिस की जाती है। इस तरह की एक्सरसाइज सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि वे वास्तविक युद्ध स्थितियों में पानी, दलदल या नदियों को पार करने के तरीकों का अभ्यास करती है।
हालांकि इस हादसे में क्या तकनीकी खराबी थी या यह पूरी तरह से ट्रेनिंग के दौरान हुई गलतियों का परिणाम था, इसका स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है। पुलिस ने कहा कि बुधवार को जवान के शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सेना की तरफ से भी इस घटना को लेकर विस्तृत आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। टैंक के डूबने की वजह, पायलटिंग स्थिति, कम्युनिकेशन गैप और सुरक्षा उपकरणों के उपयोग की भी पड़ताल की जाएगी।
घटना के समय टैंक में मौजूद दोनों जवानों ने बचने की कोशिश की थी। बाहर निकलने वाले जवान के बयान के अनुसार, टैंक जब पानी में धंसने लगा तो उन्होंने तुरंत बाहर निकलने की कोशिश की। लेकिन फंसे हुए जवान के पास बाहर निकलने का उचित मौका नहीं मिला। पानी तेज़ी से बढ़ रहा था और टैंक का अंदरूनी दबाव बहुत अधिक था। बाहर निकले जवान को भी कुछ हल्की चोटें आई हैं और उसे मेडिकल टीम की निगरानी में रखा गया है।












