फिल्मी दुनिया चमक-दमक, शोहरत और सपनों से भरी होती है, लेकिन यहां एक छोटी सी चूक या अफवाह भी किसी कलाकार की पूरी जिंदगी बदल सकती है। ऐसी ही एक कहानी है अभिनेत्री श्वेता बसु प्रसाद की, जिन्होंने महज 11 साल की उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया था।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: फिल्मी दुनिया हमेशा ग्लैमर, पैसा और शोहरत लेकर आती है। कई बार किसी कलाकार को देखते ही देखते लोगों का चहेता बना देती है। डेब्यू के तुरंत बाद जबरदस्त फैन फॉलोइंग मिलना आम बात है, और हर कोई इनके बारे में जानने को उत्सुक रहता है। लेकिन एक छोटी सी गलती कई बार इन्हें उतनी ही तेजी से जमीन पर ला सकती है, जितनी तेजी से ये ऊंचाइयों तक पहुंचाती है। कई सितारे इसी वजह से समय के साथ गुमनामी में चले गए।
ऐसा ही कुछ श्वेता बसु प्रसाद के साथ हुआ। सिर्फ 11 साल की उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीतकर उन्होंने सबको हैरान कर दिया था, लेकिन बाद में उन पर जिस्म फरोशी के कारोबार का आरोप लगा, जिसके कारण एक्ट्रेस को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, श्वेता ने हार नहीं मानी और कठिन दौर के बाद एक ऐसी वापसी की, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
बाल कलाकार के तौर पर शानदार शुरुआत
श्वेता बसु प्रसाद ने साल 2002 में विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘मकड़ी’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इस फिल्म में उन्होंने डबल रोल निभाया था और अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों और समीक्षकों, दोनों का दिल जीत लिया। महज 11 साल की उम्र में उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड (बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट) से नवाजा गया, जो किसी भी कलाकार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। इतनी कम उम्र में इस सम्मान ने श्वेता को रातों-रात स्टार बना दिया।
इसके बाद वह श्रेयस तलपड़े की फिल्म ‘इकबाल’ में नजर आईं, जहां उन्होंने खदीजा का किरदार निभाया। इस फिल्म में भी उनके अभिनय की खूब सराहना हुई और माना जाने लगा कि श्वेता आने वाले समय की बड़ी अभिनेत्री बनेंगी।

टीवी और साउथ फिल्मों की ओर रुख
समय के साथ श्वेता को फिल्मों में काम मिलना थोड़ा कम हुआ, जिसके बाद उन्होंने टेलीविजन की ओर रुख किया। उन्होंने कई लोकप्रिय टीवी शोज़ में अहम भूमिकाएं निभाईं। इसके साथ ही उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। तेलुगु फिल्म ‘बंगारुलोकम’ में उनके अभिनय को सराहा गया और उन्होंने यह साबित किया कि वह सिर्फ बाल कलाकार नहीं, बल्कि एक मजबूत अभिनेत्री हैं।
श्वेता बसु प्रसाद की जिंदगी का सबसे कठिन दौर साल 2014 में आया। उन्हें हैदराबाद के एक फाइव स्टार होटल से कथित तौर पर सेक्स रैकेट के आरोप में गिरफ्तार किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्हें दो बिजनेसमैन के साथ पकड़ा गया और उन्होंने आरोप स्वीकार कर लिए। इस खबर ने पूरे देश में सनसनी मचा दी और श्वेता की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा।
हालांकि बाद में इस मामले में बड़ा मोड़ आया। इस रैकेट के कथित मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद श्वेता पर लगे आरोप खारिज कर दिए गए। खुद श्वेता ने भी साफ किया कि उन्होंने कभी आरोप स्वीकार नहीं किए थे और वह एक अवॉर्ड फंक्शन में शामिल होने हैदराबाद गई थीं। बावजूद इसके, इस विवाद का असर उनके करियर पर लंबे समय तक रहा और उन्हें करीब दो महीने जेल में भी रहना पड़ा।
निजी जिंदगी में उतार-चढ़ाव
पेशेवर संघर्षों के बीच श्वेता की निजी जिंदगी भी आसान नहीं रही। साल 2018 में उन्होंने फिल्म निर्माता रोहित मित्तल से शादी की, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चला और 2019 में दोनों अलग हो गए। श्वेता ने अपने तलाक की वजहों पर कभी खुलकर बात नहीं की, लेकिन इस दौर में उन्होंने खुद को संभाला और दोबारा अपने करियर पर ध्यान केंद्रित किया।













