संसद का शीतकालीन सत्र: 10 महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में हैं मोदी सरकार

संसद का शीतकालीन सत्र: 10 महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में हैं मोदी सरकार

अगले महीने की 1 तारीख से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। इस सत्र में केंद्र सरकार 10 नए बिल पेश करेगी। पेश किए जाने वाले बिलों में एटॉमिक एनर्जी बिल, 2025, भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक और राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं।

नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहा है और इसे लेकर केंद्र सरकार ने पहले से ही लेजिस्लेटिव एजेंडा जारी कर दिया है। लोकसभा की तरफ से जारी बुलेटिन के अनुसार, 1 से 19 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में सरकार कुल 10 नए महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी। इन विधेयकों में परमाणु ऊर्जा बिल, 2025, उच्च शिक्षा आयोग विधेयक, राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक और कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल शामिल हैं।

सरकार का उद्देश्य इन विधेयकों के माध्यम से देश की ऊर्जा, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और कॉरपोरेट सुधारों को आगे बढ़ाना है। आइए जानते हैं शीतकालीन सत्र में पेश होने वाले प्रमुख विधेयकों की सूची और उनके उद्देश्य:

परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025

यह बिल भारत में परमाणु ऊर्जा के नियमन और विकास के लिए लाया गया है। इसके तहत प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने की अनुमति मिलेगी। वर्तमान में देश में सभी न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट सरकारी कंपनियों जैसे NPCIL द्वारा संचालित होते हैं। नए बिल के लागू होने के बाद भारतीय और विदेशी निजी क्षेत्र की कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश कर सकेंगी।

उच्च शिक्षा आयोग विधेयक

यह विधेयक भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और उत्कृष्टता बढ़ाने के लिए पेश किया जा रहा है। इसके तहत एक उच्च शिक्षा आयोग का गठन होगा, जो विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को स्वतंत्र और स्वशासी बनाने में मदद करेगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक

इस बिल के पारित होने के बाद नेशनल हाईवे परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी। इसका उद्देश्य हाईवे निर्माण में देरी को कम करना और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देना है।

कॉरपोरेट कानून (संशोधन) बिल, 2025

यह विधेयक व्यवसाय करने में आसानी लाने के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 और एलएलपी (सीमित देयता भागीदारी) अधिनियम, 2008 में सुधार करेगा। इसके जरिए निवेशकों और कंपनियों को कानूनी प्रक्रिया में आसानी मिलेगी।

प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक (एसएमसी), 2025

यह बिल भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992, डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996 और प्रतिभूति अनुबंध अधिनियम, 1956 के प्रावधानों को एक ही एकल प्रतिभूति बाजार संहिता में समेकित करेगा। इसका उद्देश्य वित्तीय बाजार को और अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।

संविधान संशोधन से जुड़ा बिल

सरकार ने संविधान के 131वें संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को संविधान के आर्टिकल 240 के दायरे में लाया जाएगा। आर्टिकल 240 के तहत केंद्र सरकार केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नियम बना सकती है, जिन्हें कानून का दर्जा प्राप्त होता है।

मध्यस्थता और सुलह अधिनियम (संशोधन) बिल

इस बिल का उद्देश्य कंपनियों और नागरिकों के बीच विवादों के समाधान को तेज करना है। आर्बिट्रेशन के फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा और कोर्ट में लंबित मामलों को कम किया जाएगा।

इसके अलावा, पिछले सत्र में लाए गए दो अधूरे विधेयक को भी इस सत्र में विचार और पारित करने की संभावना है। इसके साथ ही, वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी संसद में पेश किया जाएगा। संसद का यह शीतकालीन सत्र कुल 15 कार्य दिवसों का होगा और 19 दिसंबर 2025 को समाप्त होगा। सरकार की तैयारी से यह स्पष्ट है कि अगले सत्र में देश के ऊर्जा, शिक्षा, वित्तीय और बुनियादी ढांचा सुधारों में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

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