सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट पर नकेल कसने की तैयारी, सरकार ले सकती है बड़ा कदम

सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट पर नकेल कसने की तैयारी, सरकार ले सकती है बड़ा कदम

सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता को रोकने के लिए भारत सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद डिजिटल मीडिया कोड ऑफ एथिक्स और IT एक्ट की धारा 67 में बदलाव किया जाएगा, जिससे अब आम यूजर्स पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई संभव होगी।

Social Media Obscenity Law: भारत सरकार सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री पर लगाम लगाने के लिए सख्त कानून लाने की तैयारी में है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद लिया जा रहा है। सरकार डिजिटल मीडिया कोड ऑफ एथिक्स में संशोधन करेगी और IT एक्ट की धारा 67 का दायरा बढ़ाएगी। यह बदलाव पूरे देश में लागू होगा और इसका असर सीधे सोशल मीडिया यूजर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा। इसका मकसद महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों को डिजिटल स्तर पर सुरक्षित करना है।

Social Media पर अश्लीलता पर सरकार का बड़ा एक्शन

सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ रही अश्लील सामग्री को लेकर भारत सरकार अब सख्त रुख अपनाने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद सरकार डिजिटल मीडिया कोड ऑफ एथिक्स में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। इसके साथ ही IT एक्ट की धारा 67 का दायरा बढ़ाकर इसे सीधे सोशल मीडिया यूजर्स पर भी लागू किया जाएगा।

अब तक यह कानून मुख्य रूप से टीवी और डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स तक सीमित था, लेकिन नए बदलावों के बाद कोई भी व्यक्ति अगर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक या अश्लील कंटेंट फैलाता पाया गया तो उसके खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर सरकार की तैयारी

यह मामला उस वक्त गंभीर रूप से चर्चा में आया, जब एक चर्चित यूट्यूबर से जुड़े केस के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट को लेकर सख्त कानून बनाने की जरूरत बताई। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा नियम तेजी से बदलते डिजिटल माहौल के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भरोसा दिलाया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नए और ज्यादा प्रभावी नियम लाए जाएंगे। इन बदलावों का मकसद सिर्फ कंटेंट क्रिएटर्स नहीं, बल्कि आम सोशल मीडिया यूजर्स को भी जिम्मेदार बनाना है।

नए नियमों से यूजर्स पर भी बढ़ेगी जिम्मेदारी

सरकार की योजना के मुताबिक, Digital Media Code of Ethics को ज्यादा सख्त बनाया जाएगा। इसके तहत अब सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने, वीडियो शेयर करने और रील बनाने से पहले यूजर्स को भी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

अगर कोई व्यक्ति किसी महिला या किसी अन्य व्यक्ति को अभद्र तरीके से दिखाता है, अश्लीलता को बढ़ावा देता है या जानबूझकर आपत्तिजनक कंटेंट फैलाता है, तो इसे गंभीर आपराधिक श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मामलों में सीधे IT एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।

IT एक्ट की धारा 67 का दायरा होगा व्यापक

फिलहाल IT एक्ट की धारा 67 सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और स्ट्रीमिंग सेवाओं पर प्रभावी रूप से लागू होती है। लेकिन सरकार अब इसके दायरे को बढ़ाकर सोशल मीडिया यूजर्स तक ले जाने की तैयारी में है।

दायरा बढ़ने के बाद कोई भी व्यक्ति अगर सोशल मीडिया पर अश्लील वीडियो, फोटो या कंटेंट शेयर करता है, तो उस पर जुर्माना, गिरफ्तारी और कानूनी कार्यवाही तक की कार्रवाई हो सकती है। इसका सीधा असर सोशल मीडिया पर कंटेंट शेयर करने की आदतों पर पड़ेगा।

पोस्ट करने से पहले सौ बार सोचेंगे यूजर्स

नए नियम लागू होने के बाद सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे पोस्ट करने की आजादी सीमित हो सकती है। सरकार का मानना है कि सख्त कानून से लोग कंटेंट पोस्ट करने से पहले उसकी सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी जरूर समझेंगे।

विशेषज्ञों का भी कहना है कि यह कदम बच्चों, महिलाओं और डिजिटल यूजर्स की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है। अब तक अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर कार्रवाई की प्रक्रिया धीमी थी, लेकिन नए बदलावों से इसमें तेजी आएगी।

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