भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से जुड़े एक पुराने मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने वर्ष 2017 में पारित उस आदेश में संशोधन की मांग की है, जिसमें उन्हें बीसीसीआई के मामलों से खुद को अलग रखने का निर्देश दिया गया था।
स्पोर्ट्स न्यूज़: पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर पहले के एक आदेश में संशोधन की मांग की है, जिसमें उन्हें क्रिकेट बोर्ड से जुड़े मामलों से दूर रहने का निर्देश दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची की पीठ ने अनुराग ठाकुर की याचिका पर दो सप्ताह बाद सुनवाई करने पर सहमति जताई।
अनुराग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने अदालत को बताया कि 2 जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि अनुराग ठाकुर तत्काल प्रभाव से बीसीसीआई के कामकाज से खुद को अलग रखें। साथ ही उनके खिलाफ अवमानना और झूठी गवाही (परजरी) की कार्यवाही भी शुरू की गई थी।
क्या है मामला?
यह मामला 2 जनवरी 2017 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा है। उस समय शीर्ष अदालत ने अनुराग ठाकुर को तत्काल प्रभाव से बीसीसीआई के कामकाज से दूर रहने का निर्देश दिया था। साथ ही उनके खिलाफ अवमानना और झूठी गवाही (परजरी) की कार्यवाही भी शुरू की गई थी। यह कार्रवाई उस कथित झूठे हलफनामे को लेकर की गई थी, जो बीसीसीआई की स्वायत्तता के मुद्दे पर तत्कालीन आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर को लिखे गए पत्र से संबंधित था।
हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर के खिलाफ शुरू की गई अवमानना और परजरी की कार्यवाही को समाप्त कर दिया था। इसके बावजूद, बीसीसीआई से जुड़े रहने पर लगी रोक अब भी प्रभावी बनी हुई है, जिसे लेकर अनुराग ठाकुर ने संशोधन की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
अनुराग ठाकुर की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई की। ठाकुर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने अदालत को बताया कि 2017 का आदेश उन्हें सुने बिना पारित किया गया था। पटवालिया ने दलील दी कि जब अवमानना और परजरी की कार्यवाही पहले ही समाप्त की जा चुकी है, तो बीसीसीआई के कामकाज से दूर रहने से संबंधित “सीज एंड डिसिस्ट” निर्देश को जारी रखना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि इस आदेश में संशोधन किया जाए।
पीठ ने इस दलील पर विचार करते हुए कहा कि इस याचिका पर दो सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि बीसीसीआई से जुड़े अन्य सभी लंबित मामलों और आवेदनों पर तीन सप्ताह बाद विचार किया जाएगा।
अमीकस क्यूरी को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नियुक्त अमीकस क्यूरी, वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह, को भी अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि वे बीसीसीआई से जुड़े सभी हस्तक्षेप और अंतरिम आवेदनों को मुद्दों के आधार पर अलग-अलग करें और उन्हें सुव्यवस्थित रूप से अदालत के समक्ष पेश करें, ताकि सुनवाई में आसानी हो।
यह मामला सिर्फ अनुराग ठाकुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध बीसीसीआई की कार्यप्रणाली, स्वायत्तता और क्रिकेट प्रशासन में न्यायिक हस्तक्षेप से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट लंबे समय से बीसीसीआई में सुधारों, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। अनुराग ठाकुर, जो कभी बीसीसीआई के अध्यक्ष रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं, उनकी याचिका को इस संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि क्या किसी पूर्व पदाधिकारी पर लगाए गए प्रतिबंध को समय और परिस्थितियों के बदलने के साथ संशोधित किया जा सकता है।












