Test Cricket में टीम इंडिया का संकट, कोचिंग सिस्टम पर BCCI का मंथन जारी

Test Cricket में टीम इंडिया का संकट, कोचिंग सिस्टम पर BCCI का मंथन जारी

टेस्ट क्रिकेट में लगातार हार के बाद टीम इंडिया की चिंता बढ़ गई है। घरेलू सीरीज में खराब प्रदर्शन से BCCI ने नए टेस्ट कोच पर मंथन शुरू किया है। VVS Laxman से अनौपचारिक बातचीत की खबर सामने आई है।

स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय क्रिकेट इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया का हालिया प्रदर्शन BCCI के लिए चिंता का बड़ा कारण बन चुका है। लगातार घरेलू और विदेशी सीरीज में मिली हार ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब टेस्ट टीम के लिए अलग कोच की जरूरत है। इसी बीच खबर सामने आई है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI ने नए टेस्ट कोच की तलाश को लेकर शुरुआती स्तर पर बातचीत शुरू कर दी है।

घरेलू मैदान पर हार ने बढ़ाई परेशानी

भारत को हाल ही में अपने ही घर पर साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 0-2 से करारी हार का सामना करना पड़ा। यह हार इसलिए भी चौंकाने वाली रही क्योंकि भारतीय टीम लंबे समय से घरेलू मैदानों पर अजेय मानी जाती रही है।

इस सीरीज में भारत के स्पिनर्स उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। वहीं साउथ अफ्रीका के बल्लेबाजों ने भारतीय स्पिन अटैक के सामने पूरी मजबूती से बल्लेबाजी की और मैच पर पकड़ बनाए रखी। इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में भी भारत का क्लीन स्वीप हो चुका था। इन लगातार नाकामियों ने टीम मैनेजमेंट और कोचिंग सेटअप पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

BCCI ने शुरू की अनौपचारिक बातचीत

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ट सीरीज में लगातार मिल रही विफलताओं के बाद BCCI के एक शीर्ष अधिकारी ने अनौपचारिक तौर पर VVS Laxman से संपर्क किया। उनसे यह पूछा गया कि क्या वह भारतीय टेस्ट टीम के कोच बनने में रुचि रखते हैं।

इस बातचीत से यह साफ संकेत मिलता है कि बोर्ड टेस्ट क्रिकेट को लेकर गंभीर मंथन कर रहा है। हालांकि यह बातचीत औपचारिक नहीं थी, लेकिन इससे यह जरूर जाहिर होता है कि BCCI भविष्य के विकल्पों पर नजर बनाए हुए है।

VVS Laxman ने क्यों नहीं दिखाई रुचि

फिलहाल VVS Laxman टेस्ट टीम के कोच बनने के इच्छुक नहीं हैं। वह इस समय बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में क्रिकेट प्रमुख की भूमिका निभा रहे हैं और उसी जिम्मेदारी में संतुष्ट नजर आ रहे हैं।

लक्ष्मण लंबे समय से NCA और भारतीय क्रिकेट की टैलेंट पाइपलाइन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक वह फिलहाल फील्ड कोचिंग की जिम्मेदारी लेने के बजाय सिस्टम को मजबूत करने के काम में लगे रहना चाहते हैं।

मौजूदा कोच का करार

भारतीय टीम के मौजूदा कोच का करार वनडे वर्ल्ड कप 2027 तक है। यानी कागजों पर फिलहाल कोई बदलाव जरूरी नहीं दिखता। लेकिन टेस्ट क्रिकेट में खराब प्रदर्शन के बाद इस करार पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

BCCI के भीतर यह चर्चा तेज हो चुकी है कि क्या तीनों फॉर्मेट के लिए एक ही कोच सही विकल्प है या फिर टेस्ट क्रिकेट के लिए अलग कोच की जरूरत है। टेस्ट क्रिकेट की अलग चुनौतियां हैं और इसके लिए अलग सोच और रणनीति की जरूरत पड़ती है।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 पर टिकी नजर

पीटीआई की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अब बहुत कुछ भारतीय टीम के T20 World Cup 2026 के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। अगर टीम इंडिया यह टूर्नामेंट जीतती है या फाइनल तक पहुंचती है, तो BCCI मौजूदा कोचिंग सेटअप पर भरोसा बनाए रख सकता है।

लेकिन अगर वहां भी टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, तो बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं। ऐसे में टेस्ट क्रिकेट के साथ-साथ लिमिटेड ओवर फॉर्मेट में भी नए प्रयोग देखने को मिल सकते हैं।

आगे की टेस्ट चुनौतियां

भारतीय टीम को ICC World Test Championship के तहत अभी श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैच खेलने हैं। इसके बाद अक्टूबर में न्यूजीलैंड का दौरा प्रस्तावित है।

सबसे बड़ी चुनौती जनवरी-फरवरी 2027 में सामने आएगी, जब ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत दौरे पर पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी। यह सीरीज न सिर्फ WTC के लिहाज से अहम होगी, बल्कि भारतीय टेस्ट क्रिकेट की दिशा भी तय कर सकती है।

खिलाड़ियों के मन में असुरक्षा की भावना

सूत्रों की मानें तो मौजूदा कोचिंग दौर में कई खिलाड़ी खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। इसकी तुलना अक्सर Rahul Dravid के कार्यकाल से की जा रही है।

द्रविड़ के कोच रहते खिलाड़ियों की भूमिका साफ होती थी और उन्हें अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए पर्याप्त समय मिलता था। उनके तीन साल के कार्यकाल में खिलाड़ियों को भरोसे के साथ मौके दिए गए, जिससे टीम का माहौल स्थिर बना रहा।

Shubman Gill का उदाहरण

हाल के समय में Shubman Gill का मामला भी चर्चा में रहा है। उन्हें टी20 टीम में उपकप्तान बनाकर वापसी कराई गई, लेकिन खराब प्रदर्शन के चलते वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके।

इसके बाद उन्हें T20 World Cup 2026 की स्क्वाड से बाहर कर दिया गया। इतनी जल्दी वापसी और फिर टीम से बाहर होना, अन्य खिलाड़ियों के मन में भी संशय पैदा कर रहा है। खिलाड़ी यह सोचने पर मजबूर हैं कि खराब फॉर्म का मतलब तुरंत बाहर का रास्ता हो सकता है।

कोचिंग मॉडल पर होगा मंथन

आगामी टूर्नामेंट्स के बाद IPL का आयोजन होगा। इसके बाद BCCI के पास यह सोचने के लिए पर्याप्त समय होगा कि अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग कोच रखे जाएं या फिर एक ही कोच तीनों फॉर्मेट संभाले।

VVS Laxman से हुई बातचीत यह साफ करती है कि BCCI ने नए टेस्ट कोच की तलाश की प्रक्रिया को पूरी तरह न सही, लेकिन मानसिक रूप से शुरू जरूर कर दिया है। आने वाले महीनों में इस दिशा में ठोस कदम भी देखने को मिल सकते हैं।

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