TRAI ने भारत में स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। अब किसी मोबाइल नंबर पर 10 दिनों में पांच या उससे अधिक शिकायतें दर्ज होने पर ऑपरेटर तुरंत कार्रवाई करेंगे। AI और ब्लॉकचेन आधारित निगरानी से नंबरों की पहचान तेज होगी और डिजिटल ठगी पर नियंत्रण आसान होगा। यह कदम उपभोक्ताओं को सुरक्षित टेलीकॉम अनुभव देने के लिए अहम है।
TRAI Guidelines on Spam Calls: भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 27 फरवरी 2026 से स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज पर सख्त नियम लागू किए हैं। अब अगर किसी मोबाइल नंबर के खिलाफ 10 दिनों में पांच या उससे अधिक शिकायतें दर्ज होती हैं, तो संबंधित ऑपरेटर तुरंत कार्रवाई करेगा। AI और मशीन लर्निंग के जरिए संदिग्ध नंबर दो घंटे में अन्य नेटवर्क के साथ साझा किए जाएंगे, ताकि डिजिटल धोखाधड़ी रोकने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित टेलीकॉम अनुभव सुनिश्चित किया जा सके।
तेज और अनिवार्य कार्रवाई
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने स्पैम कॉल और फर्जी मैसेज को रोकने के लिए नए सख्त नियम लागू किए हैं। अब अगर किसी मोबाइल नंबर के खिलाफ 10 दिनों में पांच या उससे अधिक शिकायतें दर्ज होती हैं, तो संबंधित ऑपरेटर को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। इसका उद्देश्य डिजिटल ठगी और फर्जी संदेशों पर तेजी से लगाम लगाना है।
टेलीकॉम कंपनियों को आदेश दिया गया है कि वे अपनी AI और मशीन लर्निंग प्रणाली का इस्तेमाल कर संदिग्ध नंबरों की पहचान तुरंत करें। AI से पकड़े गए नंबर की जानकारी अधिकतम दो घंटे के भीतर अन्य ऑपरेटरों के साथ साझा करना अनिवार्य है। यह पूरी प्रक्रिया ब्लॉकचेन आधारित DLT प्लेटफॉर्म पर होगी, जिससे डेटा सुरक्षित और छेड़छाड़ रहित रहेगा।

ऑपरेटर दोनों जिम्मेदार
नए नियमों में कॉल करने और रिसीव करने वाले दोनों ऑपरेटर जिम्मेदार होंगे। AI सिस्टम कॉल लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों को चिन्हित करेगा, जिससे फर्जी कॉल करने वालों की पहचान आसान होगी। इस कदम से यूपीआई फ्रॉड, फर्जी बैंक मैसेज, नकली लोन ऑफर और केवाईसी अपडेट जैसी ठगी पर लगाम लग सकेगी।
ब्लॉकिंग और उपभोक्ता सुरक्षा
अगर किसी नंबर पर लगातार शिकायतें आती हैं, तो ऑपरेटर उसे अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक कर सकते हैं। इस कदम से आम मोबाइल यूजर्स को स्पैम कॉल और फर्जी संदेशों से सुरक्षा मिलेगी। भारत में एक अरब से ज्यादा मोबाइल उपयोगकर्ता इस नीति से लाभान्वित होंगे, क्योंकि अब डिजिटल फ्रॉड के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।











