Greenland Dispute में डेनमार्क ने ट्रंप की धमकी पर कड़ा रुख अपनाया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सैनिक किसी भी आक्रमण पर तुरंत कार्रवाई करेंगे। 1952 के निर्देश के तहत ग्रीनलैंड किसी भी कब्ज़े के लिए बंद है।
Greenland Dispute: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की धमकी के कुछ दिनों बाद डेनमार्क ने कड़ा रुख अपनाया है। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को चेतावनी जारी की कि अगर कोई डेनिश क्षेत्र पर हमला करता है, तो उनके सैनिक तुरंत कार्रवाई करेंगे और अपने कमांडरों के आदेश का इंतजार किए बिना गोली चला देंगे। यह बयान 1952 के निर्देशों के अनुसार आया है, जिसे शीत युद्ध के समय तैयार किया गया था।
1952 का निर्देश और शीत युद्ध की पृष्ठभूमि
यह निर्देश 1952 में तैयार किया गया था, जो आज भी लागू है। इसे शीत युद्ध की परिस्थितियों और अप्रैल 1940 में नाज़ी जर्मनी के डेनमार्क पर हमले के अनुभव से बनाया गया था। उस समय देश में कम्युनिकेशन सिस्टम आंशिक रूप से ठप हो गया था और सैनिकों को आदेश का इंतजार किए बिना कार्रवाई करने की अनुमति दी गई थी। डेनमार्क के जॉइंट आर्कटिक कमांड, जो ग्रीनलैंड में सैन्य प्राधिकरण है, अंतिम रूप से यह तय करेगा कि किसी भी घटना को हमला माना जा सकता है या नहीं।
ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार यह संकेत दिया कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। उनका दावा है कि रूस और चीन की उपस्थिति के कारण यह आर्कटिक क्षेत्र रणनीतिक महत्व रखता है। ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि वह केवल संधि पर हस्ताक्षर करने से संतुष्ट नहीं हैं और पूरा ग्रीनलैंड अमेरिका का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मालिकाना हक (ownership rights) दस्तावेज़ों से ज्यादा अधिकार देता है।

अमेरिका की 1951 की संधि
संयुक्त राज्य अमेरिका 1951 की संधि का हिस्सा है, जो उसे डेनमार्क की अनुमति से ग्रीनलैंड में सैन्य चौकियां स्थापित करने के व्यापक अधिकार देती है। इसके बावजूद डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने बार-बार स्पष्ट किया है कि यह क्षेत्र बिक्री के लिए नहीं है और किसी भी सैन्य कब्ज़े की अनुमति नहीं दी जाएगी।
डेनमार्क प्रधानमंत्री की चेतावनी
डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने इस हफ्ते चेतावनी दी कि अगर कोई देश ग्रीनलैंड पर सैन्य हमला करता है, तो यह नाटो (NATO) के अंत का संकेत होगा। उन्होंने डेनिश ब्रॉडकास्टर TV2 को बताया कि अगर संयुक्त राज्य अमेरिका किसी नाटो सदस्य देश पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो गठबंधन की कार्रवाई रुक जाएगी।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति का बयान
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को फॉक्स न्यूज़ को बताया कि अमेरिका का रुख ग्रीनलैंड की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सही है। उन्होंने कहा कि डेनमार्क पर्याप्त कदम नहीं उठा सका कि आर्कटिक क्षेत्र दुनिया की सुरक्षा के लिए आधार बने। उपराष्ट्रपति ने जोर दिया कि ग्रीनलैंड न केवल अमेरिका की बल्कि पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इस क्षेत्र की मिसाइल रक्षा में भूमिका अहम है।
वाशिंगटन में डेनिश प्रतिनिधिमंडल की बैठक
इस बीच, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के दूतों ने वाशिंगटन में व्हाइट हाउस अधिकारियों से मुलाकात की। उनका उद्देश्य अमेरिकी सांसदों और ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को ग्रीनलैंड के कब्ज़े की योजना से पीछे हटाने के लिए मनाना है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अगले सप्ताह डेनिश अधिकारियों से मिलने की संभावना है।











