हापुड़ जिले में बसपा ने दो पूर्व जिलाध्यक्षों केपी सिंह और तिलक चौधरी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किया। जिलाध्यक्ष पद को लेकर सियासी उठापटक बढ़ी और कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल गया।
UP Politics: हापुड़ जिले में बसपा के जिलाध्यक्ष पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने दो पूर्व जिलाध्यक्षों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया है। निष्कासित नेताओं ने हाईकमान के सामने अपना पक्ष रखने की तैयारी कर ली है। इस कदम से बसपा में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच उठापटक बढ़ गई है और पार्टी में पहले भी जिलाध्यक्ष पद को लेकर विवाद देखने को मिल चुका है, जिससे कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ी है।
जिलाध्यक्ष पद के लिए सियासी टकराव
हापुड़ में बसपा में जिलाध्यक्ष पद को लेकर सियासी टकराव अब सार्वजनिक हो गया है। जिलाध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल दो पूर्व जिलाध्यक्षों को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। इससे पहले भी केपी सिंह को जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्त करने के एक सप्ताह बाद ही हटाया जा चुका था। पार्टी ने अब उन्हें और तिलक चौधरी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया है। दोनों पूर्व जिलाध्यक्ष हाईकमान के सामने अपने पक्ष और सबूत रखने की तैयारी कर रहे हैं।

बसपा में बढ़ती असंतोष की स्थिति
प्रदेश में लंबे समय तक सत्ता में रही बसपा अब हापुड़ में चौथे नंबर का राजनीतिक दल बनकर रह गई है। पिछले चुनावों में कमजोर प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं में उदासीनता बढ़ गई है। कांग्रेस, सपा और भाजपा अब बसपा के परंपरागत मतदाताओं को लुभाने में जुटी हैं। वहीं, पार्टी को सबसे अधिक नुकसान चंद्रशेखर की आजाद पार्टी से हो रहा है।
जिलाध्यक्ष पद पर उठापटक
बसपा के वरिष्ठ नेता डॉ. एके कर्दम कई बार जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। हाल ही में पार्टी ने डॉ. कर्दम को हटाकर केपी सिंह को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया था। लेकिन केपी सिंह ने ठीक से कार्यभार संभाला भी नहीं था कि एक सप्ताह में उन्हें फिर से हटाया गया। अब पार्टी ने तीसरी बार डॉ. एके कर्दम को जिलाध्यक्ष पद पर रखा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, जिलाध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक गोटियां बिछाई जा रही थीं। डॉ. एके कर्दम को दो पूर्व जिलाध्यक्षों केपी सिंह और तिलक चौधरी से चुनौती मिलने के कयास लगाए जा रहे थे। इसी बीच पार्टी ने चौंकाने वाला निर्णय लिया और दोनों पूर्व जिलाध्यक्षों को निष्कासित कर दिया।











