सीरिया में ISIS के खिलाफ अमेरिका ने अब तक की सबसे बड़ी एयर स्ट्राइक की है। ऑपरेशन Hawk Eye Strike के तहत 35 से ज्यादा आतंकी ठिकाने तबाह किए गए। इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।
US Air Strike Syria: सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अमेरिका ने एक बार फिर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी सेना ने बड़े पैमाने पर हवाई हमला करते हुए ISIS के दर्जनों आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है, जब क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में किसी तरह की नरमी नहीं होगी।
ऑपरेशन Hawk Eye Strike के तहत बड़ी सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी है कि यह हमला ‘ऑपरेशन Hawk Eye Strike’ के तहत किया गया। इस अभियान में सीरिया के अलग अलग इलाकों में मौजूद ISIS के 35 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी वायुसेना ने 90 से अधिक बार सटीक एयर स्ट्राइक की। इस दौरान अत्याधुनिक fighter jets और precision weapons का इस्तेमाल किया गया, ताकि आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी समयानुसार दोपहर करीब 12:30 बजे यह हमला शुरू हुआ। कुछ ही घंटों में ISIS के कई ठिकाने पूरी तरह नष्ट कर दिए गए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान रणनीतिक रूप से बेहद अहम था और इसके जरिए आतंकियों की कमर तोड़ दी गई है।
सोशल मीडिया पर CENTCOM की पुष्टि
CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस ऑपरेशन की आधिकारिक जानकारी साझा की। पोस्ट में कहा गया कि यह कार्रवाई क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के उद्देश्य से की गई है। CENTCOM ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने सैनिकों और सहयोगी बलों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा।
पोस्ट में दो टूक शब्दों में कहा गया, “जो भी हमारे सैनिकों या नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, उसे दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढकर खत्म किया जाएगा।” यह बयान अमेरिका की आतंक के खिलाफ सख्त नीति को साफ तौर पर दर्शाता है।
आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का कड़ा संदेश
इस एयर स्ट्राइक को सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है। CENTCOM के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भविष्य में होने वाले आतंकी हमलों को रोकना, ISIS की बची खुची ताकत को खत्म करना और क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि ISIS भले ही पहले जितना मजबूत न हो, लेकिन उसके स्लीपर सेल और छोटे आतंकी ग्रुप अभी भी सक्रिय हैं। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई जरूरी हो जाती है, ताकि आतंकी संगठन दोबारा सिर न उठा सकें।
पलमायरा हमले के बाद लिया गया फैसला
ऑपरेशन Hawk Eye Strike की शुरुआत 19 दिसंबर 2025 को की गई थी। यह फैसला सीधे तौर पर 13 दिसंबर 2025 को सीरिया के पलमायरा में हुए ISIS हमले के बाद लिया गया। उस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई थी।
मारे गए सैनिकों में आयोवा नेशनल गार्ड के 25 वर्षीय सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस टोवार और 29 वर्षीय सार्जेंट विलियम नाथानियल हॉवर्ड शामिल थे। दोनों सैनिक उस अमेरिकी सैन्य दल का हिस्सा थे, जिसे इस साल की शुरुआत में मिडिल ईस्ट में तैनात किया गया था। इस हमले ने अमेरिका को यह साफ संकेत दिया कि ISIS अभी भी जानलेवा हमले करने की क्षमता रखता है।
राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू हुआ अभियान
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह सैन्य अभियान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देश पर शुरू किया गया। पलमायरा हमले के बाद व्हाइट हाउस ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और इसके बाद ISIS के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का फैसला लिया गया।
अमेरिका का मानना है कि अगर समय रहते कड़ा जवाब नहीं दिया गया, तो आतंकी संगठन फिर से खुद को संगठित कर सकता है। इसी रणनीति के तहत बड़े पैमाने पर एयर स्ट्राइक की गई, ताकि आतंकियों के ठिकानों, हथियार डिपो और कमांड सेंटर्स को पूरी तरह नष्ट किया जा सके।
90 से ज्यादा Precision Weapons का इस्तेमाल
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन के दौरान 90 से अधिक precision munitions का इस्तेमाल किया गया। इन हथियारों की खासियत यह होती है कि ये बेहद सटीक निशाने पर वार करते हैं, जिससे collateral damage यानी आम नागरिकों को नुकसान पहुंचने की आशंका कम होती है।
करीब दो दर्जन से ज्यादा fighter aircrafts ने इस मिशन में हिस्सा लिया। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि हमले से पहले पूरी intelligence gathering की गई थी, ताकि सही ठिकानों को निशाना बनाया जा सके।












