Shri Mata Vaishno Devi Institute of Medical Excellence ने MBBS कोर्स दोबारा शुरू करने के लिए National Medical Commission को नया आवेदन भेजा है। पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ की कमियों के कारण अनुमति रद्द कर दी गई थी। अब संस्थान सुविधाओं को मजबूत कर दोबारा मान्यता पाने की कोशिश कर रहा है।
MBBS Course Approval: जम्मू क्षेत्र के Shri Mata Vaishno Devi Institute of Medical Excellence ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MBBS कोर्स फिर से शुरू करने की अनुमति मांगते हुए National Medical Commission को आवेदन भेजा है। इससे पहले 7 जनवरी को NMC ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और अस्पताल में मरीजों की संख्या जैसी कमियों का हवाला देकर कॉलेज की अनुमति रद्द कर दी थी। बाद में पहले बैच के 50 छात्रों को जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया गया। अब संस्थान सुविधाओं को बेहतर बनाकर दोबारा मान्यता हासिल करने की तैयारी कर रहा है।
पहले क्यों रद्द हुई थी MBBS की अनुमति
रिपोर्ट्स के अनुसार इसी साल 7 जनवरी को National Medical Commission ने संस्थान में MBBS कोर्स चलाने की अनुमति वापस ले ली थी। इस फैसले के बाद कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को तुरंत घर लौटने के लिए कहा था, जिससे पढ़ाई को लेकर अचानक अनिश्चितता पैदा हो गई थी।
NMC ने अपने आदेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की संख्या और अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता जैसी कमियों का हवाला दिया था। हालांकि कॉलेज प्रशासन का कहना था कि संस्थान में जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं और समय के साथ उन्हें और बेहतर बनाया जा रहा है।

पहले बैच के छात्रों का क्या हुआ
इस मेडिकल कॉलेज में MBBS का पहला बैच 50 छात्रों के साथ शुरू हुआ था। जब अनुमति रद्द हुई तो छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित कर दिया गया।
जम्मू-कश्मीर के सात नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इन छात्रों को समायोजित किया गया। इनमें से 22 छात्रों को कश्मीर घाटी के तीन कॉलेजों में और बाकी छात्रों को जम्मू क्षेत्र के चार कॉलेजों में भेजा गया, ताकि उनकी पढ़ाई बिना रुकावट जारी रह सके।
अब सुधारों के साथ दोबारा कोशिश
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इस बार निरीक्षण से पहले संस्थान की सुविधाओं को और मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत Narayana Superspeciality Hospital को मेडिकल संस्थान से जोड़े जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
बताया जा रहा है कि 1 अप्रैल से इस अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी मेडिकल इंस्टीट्यूट के साथ काम करेंगे। इससे अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ेगी और मेडिकल छात्रों के लिए क्लीनिकल ट्रेनिंग की बेहतर व्यवस्था हो सकेगी।













