खरगे का मोदी सरकार पर कटाक्ष, कहा- आम जनता भुगत रही है खामियाजा

खरगे का मोदी सरकार पर कटाक्ष, कहा- आम जनता भुगत रही है खामियाजा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर हमला किया। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिकी दबाव में नीति असंगत है, शहीदों का अपमान हो रहा है और राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता किया जा रहा है।

New Delhi: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर ताबड़तोड़ हमला बोला। उन्होंने उन खबरों पर चिंता जताई जिनमें कहा गया कि सरकार सरकारी ठेकों के लिए बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंध को हटाने की योजना बना रही है। खरगे ने मोदी सरकार की विदेश नीति को असंगत और दिशाहीन बताते हुए इसे “बेकाबू पेंडुलम” करार दिया।

खरगे का आरोप है कि गलवान घाटी में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के बलिदान का अपमान किया जा रहा है और चीन के लिए ‘लाल कालीन बिछाकर’ सरकार उनके पक्ष में कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि यह फैसला आम जनता के हित के विपरीत है और देश की सुरक्षा और सम्मान के साथ समझौता करता है।

गलवान शहीदों का अपमान

खरगे ने कहा कि 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया था। यह प्रतिबंध देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया था। लेकिन अब यह प्रतिबंध हटाने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है बल्कि शहीदों के बलिदान का अपमान भी है।

उन्होंने मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के “मैं देश को झुकने नहीं दूंगा” वाले बयान का वर्तमान कार्रवाई से कोई मेल नहीं है। खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया कि “जो हो रहा है, वह बिल्कुल इसके उलट है। चीन के लिए लाल कालीन बिछाया जा रहा है और हमारी सैनिक बलिदानों को नजरअंदाज किया जा रहा है।”

अमेरिकी दबाव और प्रधानमंत्री की चुप्पी

खरगे ने अमेरिका और प्रधानमंत्री मोदी के रवैये की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प रोजाना भारत के रूसी तेल निर्यात पर टिप्पणी कर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी चुप हैं। खरगे ने इसे “आत्मसमर्पण” करार देते हुए कहा कि यह भारत की स्वतंत्र और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति के लिए गंभीर झटका है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपनी विदेश नीति में राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने में विफल रही है। अमेरिकी दबाव और चीन के साथ संबंधों को संतुलित करने में सरकार ने रणनीतिक स्वायत्तता खो दी है। खरगे ने कहा कि सरकार की नीति हमेशा बदलती रहती है और इसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

चीन के साथ संबंधों में असंगति

खरगे ने कहा कि मोदी सरकार की विदेश नीति में असंगति साफ दिखाई देती है। कभी चीन के प्रति नरम रवैया, कभी कड़ा रुख। उन्होंने बताया कि पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए चीन गए थे। वहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

खरगे ने कहा कि भारत-चीन संबंधों में संतुलन बनाना आवश्यक है, लेकिन चीन के लिए लाल कालीन बिछाना और राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करना स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि देश की सुरक्षा और सम्मान से समझौता करने वाली नीति जनता के लिए चिंता का विषय है।

विदेश नीति में बेकाबू पेंडुलम

खरगे ने विस्तार से कहा कि मोदी सरकार की विदेश नीति एक “बेकाबू पेंडुलम” की तरह झूल रही है। कभी इधर, कभी उधर। इससे न केवल राष्ट्रीय हित प्रभावित हो रहे हैं बल्कि देश की छवि भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस असंगति का सीधा खामियाजा भारतीय जनता भुगत रही है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि विदेश नीति का मतलब केवल कूटनीतिक संतुलन नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखना और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना है। उनका मानना है कि वर्तमान कदम इस दृष्टिकोण के बिल्कुल विपरीत हैं।

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