विपक्षी सांसद मकर द्वार पर प्रदर्शन, संसद में हंगामे के बीच चर्चा की मांग

विपक्षी सांसद मकर द्वार पर प्रदर्शन, संसद में हंगामे के बीच चर्चा की मांग

संसद के बजट सत्र में विपक्ष ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भारत की विदेश नीति पर विरोध प्रदर्शन किया। Rahul Gandhi के नेतृत्व में सांसदों ने सरकार से चर्चा कराने की मांग की।

Parliament Budget Session: संसद के बजट सत्र (Budget Session) के दूसरे चरण के दूसरे दिन मंगलवार को संसद परिसर और दोनों सदनों के भीतर राजनीतिक माहौल काफी गरम नजर आया। विपक्षी सांसदों ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भारत सरकार की विदेश नीति को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की।

विपक्ष का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है, इसलिए इस विषय पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद के प्रवेश द्वार मकर द्वार की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

मकर द्वार पर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन

मंगलवार सुबह संसद परिसर में उस समय हलचल बढ़ गई जब विपक्षी सांसदों का एक बड़ा समूह मकर द्वार के पास एकत्रित हुआ। सांसदों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान एक बड़ा बैनर भी दिखा जिस पर लिखा था कि प्रधानमंत्री समझौता कर चुके हैं। इस बैनर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ दिखाई गई थीं।

विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर भारत सरकार की विदेश नीति स्पष्ट नहीं है और सरकार इस विषय पर संसद में चर्चा से बच रही है। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने कहा कि यह मुद्दा केवल विदेश नीति का नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता से जुड़ा हुआ है।

निलंबित सांसद भी प्रदर्शन में शामिल

इस विरोध प्रदर्शन में कुछ ऐसे सांसद भी शामिल थे जिन्हें बजट सत्र के पहले चरण के दौरान अव्यवस्थित व्यवहार के कारण लोकसभा से निलंबित कर दिया गया था।

इन सांसदों ने भी सरकार के खिलाफ नारे लगाए और पश्चिम एशिया संकट पर संसद में चर्चा कराने की मांग दोहराई। विपक्षी दलों का कहना है कि यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि इसे संसद के अंदर गंभीरता से उठाया जाना चाहिए।

सदन के अंदर भी जारी रहा हंगामा

संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन के साथ ही दोनों सदनों के अंदर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा सांसद Sandhya Ray ने सदन की अध्यक्षता की।

वहीं राज्यसभा में कार्यवाही की अध्यक्षता C. P. Radhakrishnan ने की। जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद सदन के वेल में पहुंच गए और तख्तियां दिखाते हुए नारेबाजी करने लगे। सांसदों ने सरकार से पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा कराने की मांग की।

इस दौरान सदन में कुछ समय के लिए शोर-शराबे की स्थिति बन गई। हालांकि अध्यक्षों ने सांसदों से शांत रहने और सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने की अपील की।

राहुल गांधी ने सरकार पर लगाया गंभीर आरोप

एक दिन पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया था कि वह पश्चिम एशिया के संकट पर संसद में चर्चा से बच रही है। राहुल गांधी का कहना है कि अगर इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होती है तो यह सामने आ जाएगा कि भारत सरकार ने इस मामले में अमेरिका और इजरायल के साथ किस तरह के समझौते किए हैं।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि इसका प्रभाव दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उनके अनुसार भारत जैसे देश के लिए यह विषय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा होता है।

तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता

राहुल गांधी ने कहा कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ेगा।

उनका कहना है कि तेल की कीमतों में वृद्धि होने से भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है और इसका असर आम लोगों की जेब पर भी दिखाई देगा। इस तरह की स्थिति में सरकार को संसद में आकर अपनी रणनीति स्पष्ट करनी चाहिए।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में इस समय एक बड़े बदलाव की लड़ाई चल रही है और इसके परिणाम दुनिया भर में महसूस किए जा सकते हैं।

शेयर बाजार और आर्थिक असर की बात

रायबरेली से सांसद राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर भारत के शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। उन्होंने कहा कि जब वैश्विक स्तर पर संघर्ष बढ़ता है तो निवेशकों की चिंता बढ़ जाती है और इसका असर बाजार पर पड़ता है। उनका कहना था कि अगर पश्चिम एशिया में स्थिति और बिगड़ती है तो भारत की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका लग सकता है। राहुल गांधी ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि अगर यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है तो संसद में इस पर चर्चा करने में क्या समस्या है।

संसद में चर्चा की विपक्ष की मांग

विपक्षी दलों का कहना है कि पश्चिम एशिया का संकट केवल विदेश नीति का विषय नहीं है बल्कि इसका सीधा संबंध भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और आम जनता से है। इसलिए विपक्ष चाहता है कि संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हो और सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करे। विपक्ष का कहना है कि चर्चा के बाद अन्य मुद्दों पर भी सदन में बातचीत की जा सकती है, लेकिन फिलहाल इस मुद्दे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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