आर्यन और लाल जादुई जूते: उड़ान और जिम्मेदारी की सीख

आर्यन और लाल जादुई जूते: उड़ान और जिम्मेदारी की सीख
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आर्यन एक 8 साल का लड़का था जिसे दौड़ना बहुत पसंद था, लेकिन वह हमेशा रेस में पीछे रह जाता था। एक दिन, अपनी नानी के पुराने घर की अटारी (Attic) की साफ़-सफ़ाई करते समय, उसे एक धूल भरे संदूक में लाल रंग के पुराने कैनवास के जूते मिले। उसे नहीं पता था कि ये साधारण जूते नहीं, बल्कि उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा रोमांच थे।

कहानी

आर्यन ने उन पुराने जूतों को झाड़ा। वे देखने में बहुत साधारण थे, लाल रंग के, थोड़ी घिसी हुई रबर की सोल वाले और उनके फीते (laces) अजीब से चाँदी के रंग के थे।

उसने सोचा, 'चलो, पहनकर देखता हूँ कि ये मुझे फिट आते हैं या नहीं।'

जैसे ही आर्यन ने अपने पैर उन जूतों में डाले, उसे एक अजीब सी झुनझुनी महसूस हुई। जूते उसके पैरों में एकदम फिट बैठ गए, जैसे वे उसी के लिए बने हों। उसने एक कदम आगे बढ़ाया, लेकिन उसका पैर ज़मीन पर नहीं पड़ा! वह हवा में कुछ इंच ऊपर था।

आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने दूसरा कदम बढ़ाया, वह भी हवा में! उसने धीरे-धीरे दौड़ने की कोशिश की। जैसे ही उसने रफ़्तार पकड़ी, वह ज़मीन से और ऊपर उठने लगा। वह अपने घर की छत के बराबर ऊँचाई पर दौड़ रहा था।

'वाओ! मैं उड़ रहा हूँ!' आर्यन खुशी से चिल्लाया।

वह हवा में तैरते हुए दौड़ रहा था। नीचे लोग चींटियों जैसे दिख रहे थे। उसने अपने स्कूल के ऊपर से उड़ान भरी, जहाँ उसके दोस्त खेल के मैदान में फुटबॉल खेल रहे थे। आर्यन ने ऊपर से हाथ हिलाया, लेकिन किसी ने उसे देखा नहीं।

उसे बहुत मज़ा आ रहा था। उसने बादलों के टुकड़ों को छूने की कोशिश की। उसने एक उड़ती हुई पतंग के साथ रेस लगाई और उसे हरा दिया। पतंग उड़ाने वाला बच्चा नीचे से हैरान होकर देख रहा था कि उसकी पतंग के पास यह कौन सी चीज़ दौड़ रही है।

आर्यन उत्साह में और ऊपर, और तेज़ दौड़ने लगा। ठंडी हवा उसके कानों में सनसना रही थी। वह शहर की सबसे ऊँची इमारत, घंटाघर, के पास पहुँच गया।

लेकिन तभी एक समस्या हुई। हवा बहुत तेज़ हो गई थी और आर्यन का संतुलन बिगड़ने लगा। उसे अचानक डर लगने लगा। उसने सोचा, 'अब मैं नीचे कैसे जाऊँ?'

उसने दौड़ने की रफ़्तार कम की, लेकिन वह नीचे नहीं आ रहा था। वह बस हवा में एक ही जगह तैरने लगा। वह घंटाघर की बड़ी सुई के पास लटक गया। नीचे देखना बहुत डरावना था।

'बचाओ! मुझे नीचे जाना है!' वह धीरे से बुदबुदाया।

तभी एक कबूतर वहाँ आकर बैठा। वह 'गुटर-गूँ' करते हुए आर्यन को देखने लगा, जैसे पूछ रहा हो कि 'तुम यहाँ क्या कर रहे हो?'

कबूतर ने अपने पंख सिकोड़े और नीचे की तरफ गोता लगाया। आर्यन समझदार था। उसने देखा कि कबूतर कैसे नीचे जा रहा है। आर्यन ने भी अपने पैरों के पंजों को नीचे की तरफ झुकाया और धीरे-धीरे दौड़ने का एक्शन किया।

जादू काम कर गया! जैसे ही उसने पंजे नीचे किए, वह धीरे-धीरे ग्लाइडर की तरह नीचे आने लगा। उसने अपनी छत का निशाना साधा और आराम से 'धप्प' से अपनी छत पर लैंड किया।

उसके पैर ज़मीन पर पड़ते ही वह सामान्य महसूस करने लगा। उसने जल्दी से वे लाल जूते उतारे। अब वे फिर से साधारण पुराने जूते लग रहे थे।

आर्यन का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। यह उसके जीवन का सबसे डरावना लेकिन सबसे बेहतरीन अनुभव था। उसने उन जूतों को वापस उसी पुराने संदूक में छुपा दिया। उसने तय किया कि वह उनका इस्तेमाल तभी करेगा जब उसे सच में उनकी ज़रूरत होगी, या जब उसने हवा में 'ब्रेक' लगाना सीख लिया हो!

सीख 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि 'बड़ी शक्तियों के साथ बड़ी ज़िम्मेदारी भी आती है। किसी भी नई चीज़ या ताक़त का इस्तेमाल जोश में नहीं, बल्कि होश और पूरी जानकारी के साथ करना चाहिए, नहीं तो मज़ा सज़ा में बदल सकता है।'

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