AI को लेकर एंथ्रोपिक के चीफ साइंटिस्ट जेरेड कपलान ने बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगले 2–3 साल में AI तेजी से व्हाइट कॉलर नौकरियों पर असर डालेगा। 2027 से 2030 के बीच AI के खुद को डिजाइन करने का दौर शुरू हो सकता है, जो मानव नियंत्रण के लिए चुनौती बनेगा।
AI And The Future Of Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एंथ्रोपिक के चीफ साइंटिस्ट जेरेड कपलान ने कहा है कि आने वाले दो से तीन साल में AI बड़ी संख्या में व्हाइट कॉलर नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। यह चेतावनी वैश्विक टेक जगत के संदर्भ में सामने आई है, जहां AI की क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं। कपलान के अनुसार, 2027 से 2030 के बीच AI सिस्टम खुद अपने नए वर्जन डिजाइन करने लगेंगे, जिससे इंसानों के लिए प्रतिस्पर्धा और नियंत्रण दोनों बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
अगले 2-3 साल में AI बन सकता है सबसे बड़ा जॉब किलर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। AI कंपनी एंथ्रोपिक के चीफ साइंटिस्ट जेरेड कपलान का कहना है कि आने वाले दो से तीन साल में AI इंसानों की बड़ी संख्या में नौकरियां करने लगेगा। खासतौर पर व्हाइट कॉलर जॉब्स यानी ऑफिस से जुड़े काम सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
कपलान के मुताबिक, AI की क्षमता इतनी तेजी से बढ़ रही है कि वह अब इंसानों के बराबर ही नहीं, बल्कि कई मामलों में उनसे आगे निकल चुका है। उनका कहना है कि भविष्य में हालात ऐसे बन सकते हैं जहां इंसानों को मशीनों से सीधी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी।

2027 से 2030 के बीच आ सकता है बड़ा टर्निंग प्वाइंट
कपलान का अनुमान है कि साल 2027 से 2030 के बीच का दौर AI के लिए सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है। इस अवधि में AI सिस्टम खुद ही अपने अगले वर्जन यानी सक्सेसर को डिजाइन और ट्रेन करने में सक्षम हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया बेहद तेज और अपने आप चलने वाली हो सकती है। एक AI सिस्टम अपने से ज्यादा स्मार्ट AI बनाएगा, फिर वही सिस्टम और भी ज्यादा एडवांस AI तैयार करेगा। कपलान के अनुसार, यही वह मोड़ है जहां AI इंसानी नियंत्रण से बाहर जाने का खतरा पैदा कर सकता है।
बच्चों की पीढ़ी को मशीनों से करना पड़ेगा मुकाबला
AI की रफ्तार का अंदाजा देते हुए कपलान ने निजी उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि उनका छह साल का बच्चा भविष्य में शायद कभी भी एकेडमिक कामों में AI से बेहतर प्रदर्शन न कर पाए। यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि आने वाली पीढ़ियों को मशीनों से सीधी टक्कर लेनी पड़ सकती है।
उनका मानना है कि शिक्षा, डेटा एनालिसिस, कंटेंट क्रिएशन, कोडिंग और कई ऑफिस से जुड़े प्रोफेशन सबसे पहले AI की चपेट में आएंगे। इससे जॉब मार्केट की पूरी संरचना बदल सकती है।
AI के कंट्रोल से बाहर होने का खतरा भी बढ़ा
कपलान ने AI से जुड़े दो बड़े खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया। पहला खतरा यह है कि अगर AI सिस्टम इंसानों के कंट्रोल से बाहर चला गया तो वह कमांड मानने से इनकार कर सकता है। यह स्थिति मानवता के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है।
दूसरा बड़ा खतरा यह है कि अगर ऐसे एडवांस AI सिस्टम गलत हाथों में पहुंच गए, तो उनका इस्तेमाल गलत उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इससे साइबर अटैक, गलत सूचनाओं का प्रसार और वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।










