अन्नपूर्णा जयंती पर मां अन्नपूर्णा की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन रसोई की शुद्धि, विशेष भोग और दान-पुण्य का विधान है। खीर, तिल-गुड़ की मिठाई, फल और बेसन के लड्डू अर्पित कर सुख, समृद्धि और अन्न-धन की कामना की जाती है।
Annapurna Jayanti Puja: अन्नपूर्णा जयंती के अवसर पर देशभर में श्रद्धा के साथ मां अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है। यह पर्व मार्गशीर्ष पूर्णिमा को मनाया जाता है और मान्यता है कि इसी दिन देवी ने पृथ्वी पर अन्न संकट को दूर किया था। इस दिन घर की रसोई, चूल्हे और अन्न भंडार की विधिवत सफाई कर पूजा की जाती है। खीर, तिल-गुड़ की मिठाई, फल और लड्डू का भोग अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में अन्न-धन और समृद्धि बनी रहती है।
क्यों खास मानी जाती है अन्नपूर्णा जयंती की पूजा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब पृथ्वी पर भयंकर अकाल पड़ा था और लोग भूख से परेशान थे, तब देवी अन्नपूर्णा ने अन्न का वरदान देकर सभी को संकट से बाहर निकाला था। इस कारण उन्हें अन्न और पोषण की देवी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग नियमित रूप से मां अन्नपूर्णा की पूजा करते हैं, उनके घर में रसोई कभी खाली नहीं रहती।
अन्नपूर्णा जयंती पर विशेष रूप से रसोई की सफाई की जाती है। चूल्हे, गैस स्टोव, अनाज रखने के स्थान और भोजन पकाने के सभी बर्तनों को शुद्ध किया जाता है। इसके बाद मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाया जाता है और विधिवत पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां अन्नपूर्णा का वास स्वयं रसोई में होता है और परिवार के किसी सदस्य को भूखा नहीं सोना पड़ता।

मां अन्नपूर्णा को लगाएं ये प्रिय भोग
अन्नपूर्णा जयंती पर भोग का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ चीजें मां अन्नपूर्णा को विशेष रूप से प्रिय हैं, जिनका भोग लगाने से देवी जल्दी प्रसन्न होती हैं।
- खीर: चावल से बनी खीर को मां अन्नपूर्णा का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। इसे शुद्ध रूप से दूध, चावल, चीनी और इलायची डालकर तैयार किया जाता है। खीर बनाते समय स्वच्छता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार में बांटा जाता है।
- गुड़ और तिल की मिठाई: गुड़, तिल और देसी घी से बनी मिठाइयों का भोग भी देवी को अत्यंत प्रिय माना गया है। यह भोग ऊर्जा, शुभता और मिठास का प्रतीक माना जाता है। खास बात यह है कि सर्दियों के मौसम में तिल और गुड़ से बनी मिठाइयों का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
- फल: मां अन्नपूर्णा को मौसमी फलों का भोग भी अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि कम से कम पांच प्रकार के ताजे फल देवी को अर्पित करने चाहिए। इससे घर में स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
- बेसन के लड्डू: अन्नपूर्णा जयंती पर बेसन के लड्डू भी विशेष रूप से बनाए जाते हैं। शुद्ध देसी घी और बेसन से तैयार किए गए लड्डू देवी को अर्पित किए जाते हैं और फिर प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं।
पूजा से जुड़ी मान्यताएं और शुभ संकेत
ऐसा माना जाता है कि अन्नपूर्णा जयंती के दिन पूजा करने से अन्न, धन और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। जो लोग आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए यह पूजा विशेष फल देने वाली मानी जाती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि इस दिन मां अन्नपूर्णा से अपनी रसोई में वास करने की प्रार्थना करने से घर में हमेशा अन्न-धन बना रहता है।
कई जगहों पर इस दिन भंडारे और सामूहिक भोजन का भी आयोजन किया जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है।











