Rajasthan: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (MLSU) की अवकाशकालीन कुलगुरु प्रोफेसर सुनीता मिश्रा को औरंगजेब को ‘कुशल प्रशासक’ बताने वाले बयान की कीमत पद गंवाकर चुकानी पड़ी। राज्यपाल व कुलाधिपति ने जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। फिलहाल कुलगुरु का कार्यभार प्रो. बीपी सारस्वत संभाल रहे हैं।
उदयपुर स्थित मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कुलगुरु रहीं प्रोफेसर सुनीता मिश्रा अपने विवादित बयान को लेकर बड़े बवाल में घिर गई थीं। विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में औरंगजेब को ‘कुशल प्रशासक’ बताने पर छात्र संगठनों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विरोध बढ़ने पर उन्हें पहले अवकाश पर भेजा गया और फिर राजभवन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर उनकी छुट्टी कर दी।
रिपोर्ट में पाया गया कि पिछले 27 महीनों में उनके कई प्रशासनिक निर्णय भी विवादों का कारण बने थे। मिश्रा पांच साल में तीसरी ऐसी कुलगुरु बनीं जिन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले हटना पड़ा। उनके त्यागपत्र के बाद छात्र संगठनों ABVP और NSUI दोनों ने जश्न मनाया और इसे ‘इतिहास और मेवाड़ की परंपरा का सम्मान’ बताया।
बयान से उठा विवाद
प्रोफेसर सुनीता मिश्रा ने विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में मुगल शासक औरंगजेब को ‘कुशल प्रशासक’ बताया था। बयान सामने आते ही छात्र संगठनों ने कड़ा विरोध किया। कई दिनों तक धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल चली। दबाव बढ़ते ही विश्वविद्यालय ने उन्हें अवकाश पर भेज दिया।
जांच रिपोर्ट बनी पद जाने की वजह
राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई थी। रिपोर्ट में पाया गया कि मिश्रा के कई प्रशासनिक फैसलों से विश्वविद्यालय में विवाद, गुटबाजी और असंतोष बढ़ा। शिकायतों और बयान विवाद को देखते हुए उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया।
तीसरी कुलगुरु जो कार्यकाल से पहले हटीं
MLSU में पिछले पांच साल में यह तीसरी बार है जब विवादों के कारण कुलगुरु को पद छोड़ना पड़ा। इससे पहले अमेरिका सिंह और जेपी शर्मा को भी कार्यकाल पूरा होने से पहले हटना पड़ा था। मिश्रा ने 6 अगस्त 2023 को कुलगुरु पद संभाला था।
उनका करियर
मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली मिश्रा ने भुवनेश्वर और कटक से उच्च शिक्षा प्राप्त की। 1991 से शिक्षण कार्य शुरू किया और BHU व लखनऊ के बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
उनके नाम 23 किताबें, 400 से अधिक शोध पत्र और खाद्य प्रौद्योगिकी क्षेत्र में दो पेटेंट दर्ज हैं। उन्हें 2008 में अमेरिका में नोबेल विजेता के हाथों सम्मान भी मिला था। उनके पति सत्य नारायण भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं।
छात्र संगठनों ने मनाया जश्न
उनके इस्तीफे की खबर आते ही ABVP कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में आतिशबाजी कर मिठाई बांटी। NSUI ने भी फैसले को ‘युवा शक्ति की जीत’ बताया और कहा कि मेवाड़ की परंपरा और गौरव का सम्मान हुआ है।
राजभवन जल्द ही सर्च कमेटी सक्रिय करेगा और नए कुलगुरु के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। तब तक प्रोफेसर बीपी सारस्वत कार्यवाहक कुलगुरु के रूप में विश्वविद्यालय का संचालन देख रहे हैं।










