अयोध्या: आगामी ध्वजारोहण और विवाह-पंचमी महोत्सव के लिए भगवान रामलला को पहनाए जाने वाले विशेष परिधान की तैयारी पूरी हो गई है। यह भव्य पोशाक पीतांबरी सिल्क से तैयार की गई है, जिसमें सोने की तारों की कलाकारी की गई है। परिधान को तैयार करने में पूरा एक वर्ष का समय लगा।
सूत्रों के अनुसार, यह विशेष वस्त्र दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध धर्मावरम हथकरघा केंद्र में बुना गया। इसके बाद इसे दिल्ली भेजकर सुक्ष्म कढ़ाई और अंतिम साज-सज्जा का कार्य पूरा किया गया। इस डिज़ाइन को अंबेडकरनगर के प्रसिद्ध डिजाइनर मनीष तिवारी ने तैयार किया है।
ठंड को ध्यान में रखते हुए रामलला के लिए पीला पश्मीना शाल भी तैयार किया गया है। इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं — माता सीता, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न आदि — के लिए भी अलग-अलग रंगों के पश्मीना शाल बनवाए गए हैं।
यह परिधान विशेष रूप से दो प्रमुख अवसरों — ध्वजारोहण और विवाह-पंचमी — पर रामलला को पहनाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जाएगा और देव प्रतिमाओं को उत्सव के अनुरूप पोशाकें धारण कराई जाएंगी।
स्थानीय श्रद्धालुओं और राम मंदिर से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह पोशाक न केवल अध्यात्म और परंपरा का प्रतीक है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों के सिल्क उद्योग और बुनकर शिल्प से जुड़ाव का प्रतिनिधित्व भी करती है।











