हरियाणा के पहले CJI जस्टिस सूर्यकांत ने ली शपथ, वन रैंक-वन पेंशन समेत कई अहम मामलों में सुना चुके हैं फैसले

हरियाणा के पहले CJI जस्टिस सूर्यकांत ने ली शपथ, वन रैंक-वन पेंशन समेत कई अहम मामलों में सुना चुके हैं फैसले

जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। हरियाणा से पहले CJI बने, उन्होंने OROP, पेगासस और अन्य संवेदनशील मामलों में महत्वपूर्ण फैसले दिए। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा।

New Delhi: भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में जस्टिस सूर्यकांत ने शपथ ली है। हरियाणा के हिसार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत राज्य के पहले व्यक्ति हैं जो इस पद पर पहुंचे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में भव्य समारोह के दौरान उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहे। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक 15 महीने का होगा।

15 महीने का कार्यकाल

पूर्व CJI बी आर गवई की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 30 अक्टूबर 2025 को जस्टिस सूर्यकांत के नाम पर मुहर लगाई। अब वह 9 फरवरी 2027 तक इस पद पर आसीन रहेंगे। जस्टिस सूर्यकांत हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले पहले CJI हैं। वे एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। उन्होंने 1984 में रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से लॉ की डिग्री प्राप्त की और पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। 2011 में उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की।

कानून की दुनिया में सफर

जस्टिस सूर्यकांत जुलाई 2000 में हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने। 2001 में उन्हें सीनियर एडवोकेट के रूप में पहचाना गया। 9 जनवरी 2004 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का स्थाई जज बनाया गया। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। 24 मई 2019 को उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में महत्वपूर्ण फैसलों का हिस्सा बने।

जस्टिस सूर्यकांत के अहम फैसले

जस्टिस सूर्यकांत ने अपने करियर में कई बड़े और संवेदनशील मामलों पर फैसला सुनाया है। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने वाले अनुच्छेद 370 के रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। जस्टिस सूर्यकांत उसी बेंच का हिस्सा थे जिसने इस मामले की सुनवाई की और सरकार के फैसले को सही ठहराया, साथ ही राज्य में जल्द चुनाव कराने का निर्देश दिया।

उन्होंने गुलामी के काल में बने राजद्रोह कानून (Sedition Law) के तहत नए मामलों के दर्ज न होने का आदेश दिया। राज्य के विधेयकों से जुड़े मामलों में राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों पर टिप्पणी करने वाली बेंच का भी हिस्सा रहे। बिहार SIR मामले में उन्होंने चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि मतदाता सूची से निकाले गए 65 लाख मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं।

जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सहित सभी बार एसोसिएशन में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया। 2022 में पंजाब दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक की जांच के लिए जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में कमेटी गठित करने का भी आदेश उनके नेतृत्व में आया।

वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना को बरकरार रखने का फैसला सुनाने वाली बेंच में भी जस्टिस सूर्यकांत शामिल रहे। 1967 के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) मामले की सुनवाई करने वाली 7 जजों की पीठ में भी उनकी भूमिका रही, जिसने AMU के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खोला।

पेगासस स्पाइवेयर मामले में जस्टिस सूर्यकांत ने इसे गैरकानूनी करार दिया और मामले की जांच के लिए साइबर एक्सपर्ट्स का पैनल नियुक्त किया। इसके अलावा, उन्होंने गैरकानूनी रूप से हटाई गई महिला सरपंच को पद पर बहाल करने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच का भी हिस्सा रहे।

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