बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा को लेकर भारत की सख्त चेतावनी, चुनाव से पहले सुरक्षा पर जोर

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा को लेकर भारत की सख्त चेतावनी, चुनाव से पहले सुरक्षा पर जोर

भारत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा की कड़ी निंदा की। विदेश मंत्रालय ने दोषियों को न्याय दिलाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, विशेषकर चुनाव से पहले।

नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा और हालिया लिंचिंग की घटनाओं को लेकर भारत सरकार ने स्पष्ट बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा को नजरअंदाज नहीं कर सकता। उन्होंने दीपू दास और अमृत मंडल की हत्या की कड़ी निंदा की और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की रिपोर्ट

विदेश मंत्रालय ने बताया कि बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अब तक 2900 ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जो हत्या, आगजनी और जमीन हड़पने जैसी घटनाओं से संबंधित हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन घटनाओं को राजनीतिक हिंसा कह कर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश में शांति और कानून व्यवस्था के महत्व को लेकर गंभीर है।

बांग्लादेश चुनाव और तारिक रहमान की वापसी

फरवरी 2025 में बांग्लादेश में आम चुनाव होने वाले हैं। इस चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सक्रिय हो गई है और माहौल बनाने में जुटी हुई है। इसी बीच BNP के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने 17 साल बाद ढाका में कदम रखा। उनकी यह वापसी प्रतीकात्मक रही क्योंकि एयरपोर्ट पर उन्होंने नंगे पैर बांग्लादेशी धरती पर खड़े होकर देश की राजनीति में अपनी वापसी को दर्शाया।

भारत का संदेश: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बांग्लादेश में चुनाव के संबंध में कहा कि भारत चाहता है कि वहां स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव हो। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के नागरिकों के साथ अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव प्रक्रिया में भाग लें और लोगों की आवाज को सुरक्षित बनाए रखें।

हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की गंभीरता

हाल ही में बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों ने हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ा दिए हैं। दीपू दास नामक युवक को ईशनिंदा के झूठे आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को पेड़ से लटका कर आग लगा दी। इसके कुछ ही दिन बाद राजबाड़ी में अमृत मंडल उर्फ सम्राट नामक युवक को भी भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारत सरकार के अलावा अन्य देशों में भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह हिंसा रोकने और दोषियों को सजा दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाए।

भारत की सख्त चेतावनी

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर किसी भी व्यक्ति को सताना और हिंसा फैलाना स्वीकार्य नहीं है। भारत ने बांग्लादेश की सरकार से अपील की है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और कट्टरपंथी तत्वों को संरक्षण देना बंद करे।

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