गुरुवार को विधान मंडल के समक्ष वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पेश की। चार खंडों में प्रस्तुत इस रिपोर्ट में वाणिज्य-कर, कृषि, परिवहन, शैक्षणिक अवसंरचना और अन्य आधारभूत संरचनाओं से जुड़े मामलों में कोताही और बकाया राशि का उल्लेख किया गया है।
पटना: बिहार विधानमंडल में वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें राज्य के विभिन्न विभागों में व्यापक वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ। 31 मार्च, 2025 तक कुल 92,132.75 करोड़ रुपये के 62,632 उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) विभागों द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए थे। यह पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी को दर्शाता है, जब 70,877.61 करोड़ रुपये के यूसी लंबित थे।
रिपोर्ट चार खंडों में प्रस्तुत की गई, जिसमें वाणिज्य-कर, कृषि, परिवहन, खनन, राजस्व व भूमि सुधार, शैक्षणिक अवसंरचना और अन्य आधारभूत संरचनाओं से जुड़े मामलों में अनियमितताओं का विवरण शामिल है।
शैक्षणिक अवसंरचना में करोड़ों का नुकसान
बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड द्वारा ठेकेदारों को 94.25 लाख रुपये का अनुचित लाभ दिया गया। अग्रिम और ब्याज वसूली न होने के कारण निगम को कुल 97.08 लाख रुपये का नुकसान हुआ। पश्चिम चंपारण जिले में लौरिया-शिकारपुर-ठोरी पथ पर पुल निर्माण परियोजना पर 5.35 करोड़ रुपये का व्यर्थ खर्च हुआ। प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल अधिनियम के कारण पुल अधूरा पड़ा हुआ है।
नौ जिलों के जिला योजना पदाधिकारी (डीपीओ) द्वारा 10.83 करोड़ रुपये के 158 कार्यों में दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई। बांका जिले के तत्कालीन डीपीओ ने 12.30 करोड़ रुपये के नौ कार्य अनियमित रूप से स्वीकृत किए। इसके अलावा, 28 सामुदायिक भवनों का निर्माण निर्धारित उद्देश्य के अनुसार नहीं हो सका। 27 भवनों पर कब्जा था और एक भवन का निर्माण अपूर्ण रहा।

कृषि अनुदान में उल्लंघन
वर्ष 2019 में दस जिलों में 21.48 करोड़ रुपये का कृषि अनुदान उन क्षेत्रों में दिया गया जिन्हें आपदा प्रभावित घोषित नहीं किया गया था। 14 अन्य जिलों के आवेदकों को 4.03 करोड़ रुपये का भुगतान ऐसे क्षेत्रों के नाम पर किया गया, जो आधिकारिक आपदा प्रभावित सूची में नहीं थे। रबी और खरीफ सीजन 2019-2020 में 151.92 करोड़ रुपये का अनुदान चिह्नित फसल क्षति क्षेत्र से 1.34 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्रों में वितरित हुआ। 2019-2022 के बीच 681,617 किसानों को 159.28 करोड़ रुपये का अनुदान उनकी फसल क्षति 33 प्रतिशत से कम होने के बावजूद दिया गया।
राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के नियमों का पालन नहीं होने से 3.74 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान हुआ। डाटाबेस प्रोसेसिंग और स्वीकृति में व्यावसायिक नियमों का पालन न होने के कारण 15.53 लाख मामलों में 56.14 करोड़ रुपये का अनियमित भुगतान हुआ।
परिवहन विभाग में गंभीर अनियमितताएँ
वाहन फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी करने में परिवहन विभाग द्वारा गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। स्वचालित परीक्षण केंद्रों में मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। 47,223 वाहनों में से 42,672 वाहनों (90 प्रतिशत से अधिक) को नियमों के उल्लंघन के बावजूद फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी किए गए, जिससे 2.27 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई। इसके अलावा, 66,345 वाहनों की जांच में 35,921 वाहन फिटनेस परीक्षण में असफल पाए गए, जो सड़क सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।











