सांख्यिकी मंत्रालय ने नई GDP सीरीज के तहत तीसरी तिमाही में 7.8% वृद्धि दर्ज की। जुलाई-सितंबर की वृद्धि दर संशोधित होकर 8.4% हुई। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित वृद्धि 7.6% है। नई सीरीज में GST, ई-वाहन और घरेलू सेवाएं शामिल हैं।
New Delhi: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने शुक्रवार को नई राष्ट्रीय आय सीरीज के तहत तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी किए। अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 7.4 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि देश की घरेलू मांग और निवेश में सुधार का संकेत देती है।
मंत्रालय ने बताया कि नई राष्ट्रीय आय सीरीज आधार वर्ष 2022-23 पर आधारित है। इससे पहले यह आधार वर्ष 2011-12 था। नई सीरीज में जीडीपी के आकलन के लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST), ई-वाहन और घरेलू सेवाओं जैसे रसोइया, ड्राइवर और घरेलू सहायकों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं को शामिल किया गया है। इससे आर्थिक गतिविधियों का सटीक आकलन संभव हो गया है और वास्तविक स्थिति बेहतर तरीके से दर्शाई जा सकती है।
वित्त वर्ष 2025-26 में 7.6% की अनुमानित वृद्धि
MoSPI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल आर्थिक वृद्धि का अनुमान भी जारी किया। इसके अनुसार, पूरे वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। पहले इसका अनुमान 7.4 प्रतिशत था। यह वृद्धि अनुमानित है और इसमें विभिन्न क्षेत्रों जैसे निर्माण, सेवा, उद्योग और कृषि की गतिविधियों को शामिल किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नई आधार वर्ष श्रृंखला के कारण यह अनुमान अधिक विश्वसनीय और सटीक है। नई पद्धति में आर्थिक गतिविधियों का दायरा व्यापक किया गया है और पुराने आंकड़ों को नई संरचना के अनुरूप अपडेट किया गया है।
आधार वर्ष 2022-23 से नया दृष्टिकोण
आधार वर्ष वह समय अवधि होती है, जिसके उत्पादन और मूल्य स्तर को मानक मानकर भविष्य में आर्थिक वृद्धि की तुलना की जाती है। पुरानी सीरीज में यह आधार वर्ष 2011-12 था, लेकिन अब इसे 2022-23 कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बदलती आर्थिक संरचना, नई सेवाओं और उद्योगों को आंकड़ों में सही तरीके से शामिल करना है।
नई श्रृंखला में आय, उत्पादन और खर्च के अनुमान अधिक सटीक बने हैं। इसमें डिजिटल लेनदेन, ई-वाहन और घरेलू सेवाओं का योगदान भी शामिल है। इसके अलावा, जीएसटी और अन्य अप्रत्यक्ष करों के प्रभाव को भी आंकड़ों में शामिल किया गया है।
तिमाही वृद्धि दर में संशोधन
नई श्रृंखला के तहत जुलाई-सितंबर 2025-26 की वृद्धि दर को संशोधित कर 8.4 प्रतिशत किया गया है, जो पहले 8.2 प्रतिशत थी। वहीं, अप्रैल-जून तिमाही की वृद्धि दर को 7.8 प्रतिशत से घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव नई गणना पद्धति और आधार वर्ष की समकालीन संरचना के अनुसार किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संशोधन आर्थिक गतिविधियों के वास्तविक स्तर को बेहतर तरीके से दर्शाता है और नीति निर्धारकों को सही दिशा में निर्णय लेने में मदद करेगा। इसके अलावा, इससे विभिन्न क्षेत्रों की वृद्धि दर और आर्थिक योगदान की तुलना में सटीकता आएगी।











