डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य को नहीं मिला ब्रिटेन का वीजा: जर्मनी से ही निवेशकों से किया संवाद

डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य को नहीं मिला ब्रिटेन का वीजा: जर्मनी से ही निवेशकों से किया संवाद

केशव प्रसाद मौर्य को ब्रिटेन का वीजा नहीं मिलने के कारण उनका प्रस्तावित यूके दौरा रद्द हो गया। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम को निवेश से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होना था, लेकिन वीजा न मिलने की वजह से वह वहां नहीं जा सके।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का प्रस्तावित ब्रिटेन दौरा वीजा न मिलने के कारण रद्द हो गया, लेकिन उन्होंने अपने निवेश मिशन को बाधित नहीं होने दिया। जर्मनी के आधिकारिक दौरे पर मौजूद मौर्य ने वहीं से ब्रिटेन के निवेशकों के साथ वर्चुअल माध्यम से संवाद किया और उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसरों को विस्तार से प्रस्तुत किया। यह कदम भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में वैश्विक निवेश आकर्षित करने की दिशा में सरकार की सक्रिय रणनीति को दर्शाता है।

सूत्रों के अनुसार, मौर्य को ब्रिटेन यात्रा के लिए भारत सरकार की ओर से आवश्यक अनुमति और एनओसी मिल चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें यूके का वीजा जारी नहीं किया गया। वीजा अस्वीकृति के पीछे का आधिकारिक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। इसके चलते उन्हें अपना यूके दौरा रद्द करना पड़ा और वे जर्मनी से ही भारत लौटने की तैयारी में हैं।

जर्मनी दौरे के दौरान निवेशकों से हुई महत्वपूर्ण बैठकें

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ जर्मनी के दौरे पर थे, जहां उन्होंने कई प्रमुख जर्मन कंपनियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास, नई निवेश नीतियों और बुनियादी ढांचे में सुधार पर चर्चा की गई। विशेष रूप से ड्रोन तकनीक, रक्षा निर्माण, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में जर्मन कंपनियों ने रुचि दिखाई। 

जर्मन उद्योग जगत ने उत्तर प्रदेश की बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी, बड़े उपभोक्ता बाजार और निवेश-अनुकूल नीतियों को सकारात्मक कारक बताया। जर्मनी दौरे के दौरान सेवा क्षेत्र में निवेश को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। आईटी सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं और कौशल विकास से जुड़ी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। राज्य की विशाल जनसंख्या, युवा कार्यबल और तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल बुनियादी ढांचा निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

इसके अलावा रेल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लगभग 200 करोड़ रुपये के निवेश पर सहमति बनी, जिसे राज्य के परिवहन और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वर्चुअल संवाद से यूके निवेशकों को दिया भरोसा

हालांकि ब्रिटेन का दौरा रद्द हो गया, लेकिन मौर्य ने जर्मनी से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यूके के निवेशकों के साथ सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीति, सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम और तेज स्वीकृति प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने निवेशकों को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार उद्योगों के लिए पारदर्शी, सुरक्षित और सहयोगी वातावरण प्रदान कर रही है। भूमि आवंटन, लाइसेंसिंग और संचालन से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाने के प्रयास जारी हैं।

कई रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश के अवसर

बैठकों के दौरान कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग और निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

  • मेडिकल डिवाइस और हेल्थकेयर उपकरण
  • वस्त्र, चमड़ा और फुटवियर उद्योग
  • सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स
  • रक्षा निर्माण और एयरोस्पेस
  • आईटी और आईटीईएस सेवाएं
  • ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC)
  • डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

राज्य में पहले से विकसित हो रही 660 मेगावाट से अधिक डेटा सेंटर क्षमता को भी निवेशकों के लिए एक प्रमुख अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया।

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