सरकार आगामी बजट में भी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने पर जोर देने की तैयारी में है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलने और लोगों की खपत बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे निवेश और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आ सकती है।
नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2025 से पहले यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि रेलवे और हाईवे में से किसे ज्यादा फंड मिलेगा। शुरुआती संकेत बताते हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आगामी बजट में रेलवे को हाईवे सेक्टर के मुकाबले ज्यादा प्राथमिकता मिल सकती है। इसकी वजह है रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स की बढ़ती संख्या, खर्च की तेज रफ्तार और सरकार की दीर्घकालिक लॉजिस्टिक्स रणनीति।
रेलवे को मिल सकता है रिकॉर्ड बजट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले वित्त वर्ष में भारतीय रेलवे को लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया जा सकता है। यह चालू वित्त वर्ष के 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जिन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, वे अब दूसरे और तीसरे चरण में प्रवेश कर रही हैं, जहां खर्च स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। रेलवे का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) मुख्य रूप से इन क्षेत्रों पर केंद्रित है:
- नई रेलवे लाइनों का निर्माण
- मौजूदा लाइनों का मल्टी-ट्रैकिंग
- ब्रॉड-गेज नेटवर्क का पूर्ण विद्युतीकरण
- नई ट्रेनें, लोकोमोटिव और वैगन (Rolling Stock) की खरीद
आंकड़ों के अनुसार, रेलवे ने अब तक अपने वार्षिक बजट का लगभग 77% खर्च कर लिया है, जो यह दर्शाता है कि इस सेक्टर में फंड की जरूरत बनी हुई है।

हाईवे सेक्टर में क्यों सीमित बढ़ोतरी संभव
वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजमार्ग (हाईवे) सेक्टर में बजट बढ़ोतरी अपेक्षाकृत सीमित रह सकती है। कारण यह है कि बीते कुछ वर्षों में इस सेक्टर में पहले ही भारी निवेश किया जा चुका है। इसके अलावा, नए हाईवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने की रफ्तार भी धीमी पड़ी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक,
- 2026 तक 10,000 किमी हाईवे प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य रखा गया था
- लेकिन अब तक केवल करीब 2,000 किमी परियोजनाओं को ही मंजूरी मिल सकी है
- 2024-25 में भी 10,000 किमी के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 7,537 किमी प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति मिली
सड़क परिवहन मंत्रालय ने अब तक अपने बजट का करीब 68% खर्च किया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रोजेक्ट अप्रूवल की गति नहीं बढ़ी, तो अगले वित्त वर्ष में हाईवे सेक्टर को मौजूदा स्तर के आसपास ही फंड मिल सकता है।
कुल कैपेक्स पर सरकार का फोकस बरकरार
सरकार की नीति स्पष्ट है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाकर आर्थिक विकास को गति दी जाए। चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने कैपेक्स को 10% बढ़ाकर 11.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया था। अप्रैल से अक्टूबर के बीच सरकारी कैपेक्स में 13% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 6.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह रणनीति ऐसे समय में अपनाई जा रही है जब निजी क्षेत्र का निवेश अपेक्षाकृत धीमा है। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक निवेश से रोजगार बढ़ेगा, आय में इजाफा होगा और इससे मांग व उपभोग को बल मिलेगा।
बजट 2025 में सिर्फ रेलवे और हाईवे ही नहीं, बल्कि कृषि और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा सकता है। कुछ राज्यों में नहरों और सिंचाई नेटवर्क को मजबूत करने के प्रस्तावों पर विचार चल रहा है, ताकि खेती को सीधा लाभ मिल सके।










