बंगाल चुनाव 2026: ‘मंदिर–मस्जिद से नहीं जीते जाते चुनाव’, दिलीप घोष का ममता बनर्जी पर तीखा हमला

बंगाल चुनाव 2026: ‘मंदिर–मस्जिद से नहीं जीते जाते चुनाव’, दिलीप घोष का ममता बनर्जी पर तीखा हमला

पश्चिम बंगाल बीजेपी में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। दिलीप घोष ने मंदिर-मस्जिद की राजनीति की चुनावी उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए इशारों-इशारों में पार्टी की रणनीति पर टिप्पणी की है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के हालिया बयानों ने न सिर्फ राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC), बल्कि खुद बीजेपी के भीतर भी नई बहस छेड़ दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद दिलीप घोष ने साफ शब्दों में कहा है कि बंगाल के चुनाव में मंदिर–मस्जिद की राजनीति काम नहीं आने वाली।

उनके इस बयान को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हालिया धार्मिक सक्रियताओं और बीजेपी की पारंपरिक चुनावी रणनीति—दोनों पर सवाल के रूप में देखा जा रहा है।

‘धार्मिक मुद्दों से नहीं तय होते चुनावी नतीजे’ - दिलीप घोष

गुरुवार को मीडिया से बातचीत में दिलीप घोष ने कहा कि यह मान लेना गलत है कि धार्मिक प्रतीकों या ढांचों से चुनाव जीते जा सकते हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर बीजेपी की हार का उदाहरण दिया, जहां राम मंदिर के निर्माण के बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा,

'अगर मंदिर बनवाकर चुनाव जीते जा सकते, तो फैजाबाद में हार नहीं होती। इसलिए यह सोचना भी गलत है कि पश्चिम बंगाल में मंदिर या मस्जिद की राजनीति से 2026 का विधानसभा चुनाव जीता जा सकता है।'

इस बयान को ममता बनर्जी के हालिया मंदिर दर्शन और धार्मिक आयोजनों से जोड़कर देखा जा रहा है। दिलीप घोष ने इशारों में कहा कि केवल धार्मिक प्रतीकों से जनता के असल मुद्दे रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास नहीं छिपाए जा सकते।

पार्टी में नए चेहरों पर भी साधा निशाना

दिलीप घोष ने बिना किसी का नाम लिए बीजेपी में हाल ही में शामिल हुए नेताओं पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि पार्टी में सभी कार्यकर्ता समान हैं और नए शामिल हुए लोगों को अपनी जमीन और पहचान खुद बनानी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी उन नेताओं की ओर इशारा है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे, लेकिन अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए।

दिलीप घोष ने यह भी स्वीकार किया कि पार्टी के भीतर उन्हें हाशिये पर डाले जाने का अनुभव हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ एजेंडा आधारित और बेबुनियाद बातें फैलाई गईं, जिससे उन्हें अलग-थलग करने की कोशिश की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के सामने रख दिया है। मुझे खो जाने का डर नहीं है। मैंने पार्टी को खड़ा किया है और मुझे अपने काम पर भरोसा है।

दिलीप घोष ने राज्य बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य से मुलाकात कर खरगपुर में तीन दिन तक प्रचार करने की अनुमति मांगी है। उन्होंने संकेत दिए कि वे 2026 के विधानसभा चुनाव में अपनी गृह सीट खरगपुर से चुनाव लड़ना चाहते हैं।

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