भारतीय शेयर बाजार 7 जनवरी 2026 को लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। जियोपॉलिटिकल टेंशन और अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के चलते सेंसेक्स 102 अंक टूटा, जबकि निफ्टी कमजोरी के साथ 26,140 पर बंद हुआ।
Closing Bell Today: भारतीय शेयर बाजार बुधवार 7 जनवरी 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेतों और वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tension) के बीच निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। अमेरिका के टैरिफ (tariff) को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी कंपनियों की कमाई से जुड़ी उम्मीदों को कमजोर किया। इसका असर यह रहा कि दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद अंत में बाजार लाल निशान में बंद हुआ।
सेंसेक्स और निफ्टी का दिनभर का हाल
तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) बड़ी गिरावट के साथ 84,620 के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में बाजार में खास दिशा नहीं दिखी और सेंसेक्स सीमित दायरे में घूमता रहा। हालांकि जैसे-जैसे दिन बढ़ा, ऑटो और फाइनेंशियल शेयरों में मुनाफावसूली हावी हो गई, जिससे गिरावट तेज होती चली गई। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 102.20 अंक यानी 0.12 फीसदी टूटकर 84,961.14 के स्तर पर बंद हुआ।
नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) भी गिरावट के साथ 26,143 के स्तर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 26,067 तक फिसल गया था। हालांकि आखिरी घंटों में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद निफ्टी 37.95 अंक यानी 0.14 फीसदी की कमजोरी के साथ 26,140 पर सेटल हुआ।
बाजार पर दबाव के मुख्य कारण
बाजार में गिरावट के पीछे कई अहम वजहें रहीं। सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव रहा, जिससे निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता कम हुई। इसके अलावा अमेरिका के टैरिफ से जुड़ी चिंताओं ने भी ग्लोबल ट्रेड (global trade) को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
इन हालातों में निवेशक बड़ी पोजिशन लेने से बचते नजर आए। इसका सीधा असर ऑटो और बैंकिंग जैसे सेक्टरों पर पड़ा, जहां मुनाफावसूली देखने को मिली।
क्या कहती है विशेषज्ञों की राय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स (Geojit Investments) के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक, घरेलू शेयर बाजार का रुख फिलहाल सतर्क बना हुआ है। उन्होंने कहा कि तीसरी तिमाही यानी Q3FY26 के नतीजों और अमेरिका के अहम रोजगार आंकड़ों से पहले निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
उनके अनुसार, तिमाही आधार पर कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद जरूर है, लेकिन वैश्विक व्यापार को लेकर बनी अनिश्चितता विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII को फिलहाल सतर्क बनाए हुए है। यही वजह है कि बाजार में जोखिम से बचने का माहौल साफ दिख रहा है।
ऑटो और फाइनेंशियल शेयरों में मुनाफावसूली
बुधवार के कारोबार में ऑटो और फाइनेंशियल शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव सबसे ज्यादा देखने को मिला। इन दोनों सेक्टरों का भार सूचकांकों पर ज्यादा होने की वजह से बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा।
वहीं दूसरी तरफ आईटी (IT), फार्मा (Pharma) और कुछ मिडकैप शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन यह गिरावट को पूरी तरह रोक नहीं सकी।
सेंसेक्स के टॉप गेनर्स
सेंसेक्स की कंपनियों में टाइटन, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, सन फार्मा, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक और इटरनल जैसे शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। खासतौर पर आईटी सेक्टर में मजबूती देखने को मिली, जिसने बाजार को कुछ हद तक संभालने का काम किया।
सेंसेक्स के टॉप लूजर्स
गिरावट वाले शेयरों की बात करें तो मारुति, पावर ग्रिड, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे बड़े नाम दबाव में रहे। इन शेयरों में बिकवाली का असर सीधे सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप का बेहतर प्रदर्शन
जहां प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं ब्रॉडर मार्केट ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.45 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी 0.39 फीसदी की तेजी दर्ज करने में सफल रहा।
यह संकेत देता है कि निवेशक चुनिंदा शेयरों में अब भी मौके तलाश रहे हैं और पूरी तरह बाजार से दूरी नहीं बना रहे हैं।
सेक्टोरल इंडेक्स का हाल
सेक्टर के लिहाज से देखें तो निफ्टी ऑटो और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। इसके उलट निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी आईटी इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली।
निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.87 फीसदी की तेजी के साथ दिन के प्रमुख गेनर्स में शामिल रहा। आईटी शेयरों में यह बढ़त डॉलर की मजबूती और चुनिंदा खरीदारी की वजह से देखने को मिली।
एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेत
एशियाई शेयर बाजारों में बुधवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। ऑस्ट्रेलिया का ASX S&P 200 इंडेक्स 0.38 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। इसकी एक बड़ी वजह नवंबर में महंगाई दर का घटकर 3.4 फीसदी रहना रहा, जो अक्टूबर के 3.8 फीसदी से कम और बाजार के अनुमान से भी नीचे था।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) इंडेक्स 1.89 फीसदी चढ़ा, जबकि जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.45 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ।
वॉल स्ट्रीट का रुख
एशियाई कारोबार के दौरान अमेरिकी शेयर बाजारों के फ्यूचर्स में ज्यादा बदलाव नहीं दिखा। हालांकि मंगलवार को वॉल स्ट्रीट मजबूती के साथ बंद हुआ था। अमेरिका की वेनेजुएला में हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिससे अमेरिकी बाजारों में तेजी देखने को मिली।
इस दौरान S&P 500 इंडेक्स 0.62 फीसदी, डाउ जोंस 0.99 फीसदी और नैस्डैक 0.65 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए। S&P 500 और डाउ जोंस नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने में सफल रहे।












