पश्चिम एशिया में तनाव और E20 पेट्रोल नीति के चलते शुगर कंपनियों के शेयर बुधवार को 10-18 प्रतिशत तक बढ़ गए। उगर शुगर, सक्ति शुगर्स और बलरामपुर चीनी मिल्स में तेजी निवेशकों की एथेनॉल मांग पर भरोसे को दर्शाती है।
Sugar Stocks: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में अलग-अलग सेक्टर्स पर असर दिख रहा है। बुधवार को चीनी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। निवेशक इस तेजी को एथेनॉल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से जोड़कर देख रहे हैं। कमजोर व्यापक बाजार के बावजूद कई शुगर शेयर 10 से 18 प्रतिशत तक चढ़ गए। यह संकेत देता है कि निवेशक एथेनॉल नीति और गन्ना उद्योग में संभावित सुधार पर भरोसा कर रहे हैं।
बाजार में कौन-से शेयर चमके
बीएसई पर उगर शुगर वर्क्स का शेयर 16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 41.80 रुपये पर पहुंच गया। सक्ति शुगर्स ने करीब 13 प्रतिशत की तेजी दर्ज की और 17.60 रुपये पर कारोबार किया। राजश्री शुगर्स एंड केमिकल्स और केएम शुगर मिल्स में लगभग 12 प्रतिशत की तेजी आई।
इसके अलावा बजाज हिंदुस्तान शुगर और श्री रेनुका शुगर्स में करीब 10 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। बलरामपुर चीनी मिल्स का शेयर 9 प्रतिशत चढ़कर 500.20 रुपये पर पहुंच गया। त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज में भी करीब 5 प्रतिशत का उछाल दर्ज हुआ।
इस तेजी के बीच व्यापक बाजार कमजोर रहा। सुबह लगभग 10:57 बजे बीएसई सेंसेक्स 1.85 प्रतिशत गिरकर 78,753 पर ट्रेड कर रहा था। यह दिखाता है कि एथेनॉल नीति से जुड़ी उम्मीदों ने शुगर सेक्टर में निवेशकों को आकर्षित किया, जबकि बाकी सेक्टर्स दबाव में रहे।
एथेनॉल नीति से बढ़ी उम्मीद
सरकार ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में E20 पेट्रोल बेचा जाएगा। इसका मतलब है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होगा। इससे एथेनॉल की मांग बढ़ने की उम्मीद है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और मक्का, चावल जैसे अनाज से बनता है और देश में ही तैयार होता है। यह पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में साफ तरीके से जलता है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि E20 पेट्रोल की शुरूआत एथेनॉल की मांग को स्थिर करेगी और शुगर कंपनियों के लिए आय का नया स्रोत तैयार करेगी। इससे निवेशकों के बीच शुगर स्टॉक्स की खरीदारी का उत्साह बढ़ा है।
एथेनॉल की कीमतों को लेकर चिंता
हालांकि उद्योग जगत का कहना है कि एथेनॉल की कीमतों में लंबे समय से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। बलरामपुर चीनी मिल्स के मुताबिक, गन्ने की कीमत (FRP) में 16.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और उत्पादन लागत भी बढ़ रही है। पिछले तीन साल से एथेनॉल की कीमत में कोई संशोधन नहीं हुआ।
कंपनी का कहना है कि अगर एथेनॉल की कीमत बढ़ाई जाती है, तो इसका तेल कंपनियों पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि सरकार के कदम से शुगर कंपनियों को फायदा हो सकता है, जबकि ईंधन की कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा।
ब्रोकरेज फर्मों की राय
एलारा कैपिटल के मुताबिक, गन्ने की बढ़ती कीमतों के कारण चीनी से बनने वाले एथेनॉल के मुनाफे पर दबाव है। अगर नीति स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया गया तो भविष्य में चीनी-एथेनॉल उद्योग फिर से मुश्किल में पड़ सकता है। इसके बावजूद ब्रोकरेज ने बलरामपुर चीनी मिल्स पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है।
एलारा कैपिटल का मानना है कि कंपनी के पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) कारोबार में कदम रखने से आने वाले समय में अतिरिक्त लाभ हो सकता है। यह निवेशकों के लिए एक और मौका है कि वे लंबी अवधि में शुगर कंपनियों के शेयरों पर ध्यान दें।










