बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी की करारी हार के बाद राजनीति के माहिर और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पोल स्ट्रैटेजिस्ट और पॉलिटिशियन प्रशांत किशोर को एक अहम नसीहत दी है।
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी की करारी हार के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रशांत किशोर को नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि राजनीति में हमेशा आइडियोलॉजी से ज्यादा नंबर मायने रखते हैं। फडणवीस ने कहा, "डेमोक्रेसी चलाने के दो तरीके हैं, आइडियोलॉजी से या नंबरों से। लेकिन आप नंबरों के बिना आइडियोलॉजी का प्रचार नहीं कर सकते।
फडणवीस ने राजनीति का पाठ पढ़ाया
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा,
'डेमोक्रेसी चलाने के दो तरीके हैं – आइडियोलॉजी से या नंबरों से। लेकिन बिना नंबरों के आइडियोलॉजी का प्रचार करना संभव नहीं है।'
उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशांत किशोर ने बिहार चुनाव में आइडियोलॉजी की बात की, लेकिन इसके बावजूद उनकी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि राजनीति में प्रैक्टिकल होना और वास्तविकता के अनुसार कदम उठाना बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा,राजनीति केवल विचारधारा तक सीमित नहीं है। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए गठबंधन, वोटर बेस और स्थानीय समर्थन की अहमियत सबसे ज्यादा होती है। फडणवीस ने अपने अनुभवों का हवाला देते हुए बताया कि महाराष्ट्र में कई बार गठबंधन सरकारों को प्रैक्टिकल दृष्टिकोण से चलाया गया, और पार्टी की लचीलापन (flexibility) इसके लिए अहम रही।

उन्होंने 1990 के दशक का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भारत में छह अलग-अलग प्रधानमंत्री हुए, लेकिन राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए पार्टियों ने अपने गठबंधन और रणनीति में समझौता किया।
जन सुराज पार्टी की करारी हार
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने कुल 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें एक भी सीट जीतने में सफलता नहीं मिली। यह करारी हार उनकी रणनीति और वोट बैंक समझ में कमी का स्पष्ट संकेत है। किशोर की पार्टी ने तेजस्वी यादव और RJD के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन में शामिल होने से भी इनकार किया, जिससे उनकी जीत की संभावनाएं और कम हो गईं।
पार्टी की हार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा लगाए गए ‘जंगल राज’ के आरोपों को भी हवा दी, और यह दिखाया कि उनके कोर वोटर बेस (मुख्य रूप से मुस्लिम और यादव वोटर्स) में ही उनका समर्थन सीमित रहा। फडणवीस ने इसे लेकर कहा कि राजनीति में संख्या और वास्तविक आधार ही निर्णायक होते हैं। चाहे आपकी आइडियोलॉजी कितनी भी मजबूत हो, अगर वोट और गठबंधन के मामले में रणनीति सही नहीं है, तो चुनाव जीत पाना मुश्किल है।












