सब्जी की दुकान वाले पिता की बेटी बनी CGPSC टॉपर, आदिवासी युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

सब्जी की दुकान वाले पिता की बेटी बनी CGPSC टॉपर,  आदिवासी युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की चंचल पैकरा ने CGPSC 2024 परीक्षा में एसटी वर्ग में पहला स्थान हासिल कर अपने परिवार और खुद की मेहनत का फल पाया। सब्जी बेचने वाले माता-पिता की बेटी चंचल अब डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यभार संभालेंगी और आदिवासी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी कहानी दिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ निश्चय सफलता दिला सकता है।

CGPSC 2024 Topper: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की 23 वर्षीय चंचल पैकरा ने CGPSC 2024 परीक्षा में एसटी वर्ग में पहला स्थान प्राप्त किया है। सब्जी बेचने वाले माता-पिता की बेटी चंचल ने कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की। अब वह डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यभार संभालेंगी। उनकी मेहनत और संघर्ष की कहानी आदिवासी और ग्रामीण युवाओं को प्रेरित करती है कि सही मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और लगातार प्रयास से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

परिवार की मेहनत और संघर्ष से हासिल सफलता

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की 23 वर्षीय चंचल पैकरा ने CGPSC 2024 परीक्षा में एसटी वर्ग में पहला स्थान हासिल कर अपनी और अपने परिवार की मेहनत का फल पाया। सब्जी बेचने वाले माता-पिता की बेटी चंचल अब डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यभार संभालेंगी। माता-पिता ने अपनी आर्थिक स्थिति के बावजूद बेटी की पढ़ाई के लिए जमीन तक बेच दी, ताकि वह अपने सपनों को पूरा कर सके।

चंचल की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि आदिवासी और ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और समर्पण से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

शिक्षा और तैयारी की कहानी

चंचल पैकरा ने सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई शुरू की और बाद में एकलव्य विद्यालय तथा जगदलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया। राज्य सेवा की तैयारी के लिए वह बिलासपुर गईं, जहाँ उन्होंने प्रारंभिक असफलता के बाद तीन वर्षों तक मेहनत जारी रखी। प्रिलिम्स, मेंस और इंटरव्यू तीनों में सफलता पाकर उन्होंने CGPSC 2024 परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।

उनके संघर्ष और अनुशासन ने दिखाया कि दृढ़ निश्चय और समर्पित मेहनत किसी भी चुनौती को पार कर सकती है। चंचल का मानना है कि माता-पिता का त्याग और परिवार का समर्थन उनके लिए सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत रहा।

युवाओं के लिए संदेश और प्रेरणा

चंचल आदिवासी युवाओं से कहती हैं कि सीमित संसाधन या कठिन परिस्थिति को कमजोरी न समझें। आत्मविश्वास और लगातार मेहनत से ही सफलता हासिल की जा सकती है। उनका संदेश है कि कठिनाइयों को अवसर में बदलकर ही आप अपने लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं।

छत्तीसगढ़ की इस प्रेरक कहानी ने यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन, परिवार का समर्थन और दृढ़ निश्चय किसी भी युवा को उच्चतम सफलता तक ले जा सकता है।

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