डिजिटल अरेस्ट मामलों में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि इस मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है, और CBI ने इस मामले में नई FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने डिजिटल अरेस्ट मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। सरकार ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे की जांच अब सीबीआई (CBI) के अधीन है और मामले की व्यापक समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया गया है। साथ ही सरकार ने अदालत से इस मुद्दे पर ठोस योजना तैयार करने के लिए एक महीने का समय मांगा है।
डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट ऐसे मामलों को कहते हैं, जहां लोगों को ऑनलाइन ठगी, धमकी या धोखाधड़ी के माध्यम से फंसाया जाता है और उनका आर्थिक या मानसिक शोषण किया जाता है। इन मामलों में पीड़ित की संपत्ति जब्त करने, ऑनलाइन बैंकिंग या डिजिटल लेन-देन को ब्लॉक करने जैसी कार्रवाइयां की जाती हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामले बढ़े हैं, जिससे सरकार और न्यायपालिका दोनों ही सतर्क हो गए हैं।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच को और प्रभावी बनाने के लिए CBI को जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत CBI ने नए मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सरकार ने कोर्ट को स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से निपटने के लिए एक ठोस, असरदार और व्यापक योजना तैयार करने में समय लगेगा। इसलिए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा है।

हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्ट की समस्या से निपटने के लिए हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालय और विभाग शामिल हैं, जो समस्याओं की समीक्षा और समाधान के उपाय तलाश रहे हैं। कमेटी का उद्देश्य केवल जांच तक सीमित नहीं है। यह सुझाव, तकनीकी पहल, कानून और नियमों के सुधार सहित व्यापक दृष्टिकोण अपनाएगी। सरकार ने कहा कि इस कमेटी की मदद से डिजिटल अरेस्ट के मामलों में पीड़ितों को समुचित संरक्षण और राहत दी जा सकेगी।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सभी विभागों और लोगों से मिले सुझावों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत और स्थायी योजना तैयार करने के लिए समय आवश्यक है। इसके तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म, बैंकिंग और ऑनलाइन लेन-देन से जुड़े जोखिमों का मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों को रोकने और नियंत्रण में लाने के लिए व्यापक उपाय किए जाएंगे। इसके तहत सख्त नियम, जागरूकता अभियान और तकनीकी मॉनिटरिंग शामिल होगी।












