PM Modi का Gulf में फंसे Indian नागरिकों के लिए त्वरित Action Plan, नियंत्रण और निगरानी के लिए कंट्रोल रूम चालू

PM Modi का Gulf में फंसे Indian नागरिकों के लिए त्वरित Action Plan, नियंत्रण और निगरानी के लिए कंट्रोल रूम चालू

PM Modi ने खाड़ी देशों में रहने वाले 88 लाख भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। विदेश मंत्रालय ने 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो हालात पर नजर रख रहा है और आवश्यक सहायता प्रदान कर रहा है।

New Delhi: पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इस तनाव का सबसे ज्यादा असर वहां रहने वाले भारतीयों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारत सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर विदेश मंत्रालय ने एक कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो चौबीसों घंटे काम कर रहा है और हालात पर नजर रख रहा है।

खाड़ी देशों में भारतीयों की संख्या

संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान जैसे देशों में भारतीय समुदाय बड़ी संख्या में मौजूद है। केवल यूएई में ही लगभग 35 लाख भारतीय रहते हैं, जो वहां की आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। सऊदी अरब में करीब 24 लाख और कुवैत में लगभग 10 लाख भारतीय कार्यरत हैं। कुल मिलाकर खाड़ी क्षेत्र में भारतीयों की संख्या 88 लाख से अधिक है। ये समुदाय न केवल वहां की जनसंख्या में अहम योगदान देता है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

खाड़ी में जीवन सामान्य लेकिन सतर्कता जरूरी

हालांकि हालिया तनाव ने वहां रहने वाले भारतीयों में चिंता बढ़ा दी है, लेकिन व्यापक घबराहट नहीं है। दुबई और अन्य शहरों में सामान्य जीवन अपेक्षाकृत जारी है। बाजार खुले हैं, यातायात चलता है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन और सरकार पर लोगों का भरोसा भी बना हुआ है।

दुबई में लंबे समय से रहने वाले भारतीयों का कहना है कि संकट सबसे ज्यादा अल्पकालिक यात्रा पर आए लोगों के लिए परेशानी पैदा कर रहा है। ऐसे लोग जल्दी घर लौटना चाहते हैं और ट्रैवल एजेंसियों से लगातार संपर्क कर रहे हैं। वहीं लंबे समय से वहां बसे लोग जल्दबाजी में जाने के बजाय सुरक्षित रहने की रणनीति अपनाए हुए हैं।

भारत और खाड़ी देशों के आर्थिक रिश्ते

भारत और खाड़ी देशों के बीच संबंध केवल प्रवासी आबादी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार और आर्थिक स्तर पर भी मजबूत हैं। सत्तर के दशक में भारत-यूएई का व्यापार करीब 18 करोड़ डालर था, जो 2024-25 तक लगभग 100 अरब डालर तक पहुंच गया। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन चुका है।

इसके अलावा, खाड़ी देशों से भारत को बड़ी मात्रा में धन प्राप्त होता है। 2012 में केवल यूएई से भारत को लगभग 14 अरब डालर प्राप्त हुए, जो उस समय अमेरिका से आने वाले धन से भी अधिक था। सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर और बहरीन से भी बड़ी राशि आती है। इस प्रकार खाड़ी क्षेत्र से आने वाला धन भारत के कुल प्रेषण का लगभग 43 प्रतिशत होता है।

भारतीय प्रवासन में बदलाव

खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासन का स्वरूप भी समय के साथ बदल गया है। पहले मुख्य रूप से निर्माण और शारीरिक श्रम से जुड़ी नौकरियों के लिए लोग जाते थे। केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कामगार सबसे अधिक संख्या में थे। अब सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, व्यापार और सेवा क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे हैं या अपने व्यवसाय चला रहे हैं।

हर साल भारत से लगभग छह से सात लाख लोग काम की तलाश में खाड़ी देशों की ओर जाते हैं। यहां वे बेहतर मजदूरी और बेहतर जीवन अवसर की तलाश में जाते हैं, हालांकि कठिन परिस्थितियों और शोषण की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।

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