डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बदला खेल! BFSI मार्केट रिकॉर्ड लेवल पर, बैंकों पर बढ़ा दबाव

डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बदला खेल! BFSI मार्केट रिकॉर्ड लेवल पर, बैंकों पर बढ़ा दबाव

BFSI सेक्टर पिछले दो दशकों में डिजिटल प्लेटफॉर्म, फिनटेक और NBFCs की तेज ग्रोथ से 60 गुना तक बढ़ा है। बैंकों की हिस्सेदारी 85% से घटकर 54% हो गई, जबकि बीमा, कैपिटल मार्केट और फिनटेक कंपनियों ने मजबूत विस्तार किया है।

BFSI Market: भारत का बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (BFSI) सेक्टर पिछले दो दशकों में तेजी से बदला है। पहले इस सेक्टर पर सिर्फ बैंकों का दबदबा था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म, फिनटेक और नई तकनीक की वजह से इसका दायरा काफी बड़ा हो चुका है। ग्राहकों को ऑनलाइन सेवाएं मिलने से यह सेक्टर तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है और नए बिजनेस मॉडल इसकी ग्रोथ को और मजबूती दे रहे हैं।

60 गुना बढ़ा मार्केट कैप

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट बताती है कि 2005 में BFSI सेक्टर का कुल मार्केट कैप ₹1.8 लाख करोड़ था, जो अक्टूबर 2025 में बढ़कर ₹105 लाख करोड़ पहुंच गया। यह लगभग 60 गुना उछाल है। हालांकि बैंक इस विस्तार का केंद्र रहे, लेकिन उनकी हिस्सेदारी 85% से घटकर 54% रह गई क्योंकि बीमा, कैपिटल मार्केट और फिनटेक कंपनियों ने तेजी से जगह बनाई।

बीमा, कैपिटल मार्केट और फिनटेक का उभार

FY15 में जहां बीमा कंपनियों की हिस्सेदारी मात्र 1% थी, वहीं अब यह बढ़कर 12% हो चुकी है। कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियां भी 6% हिस्सेदारी तक पहुंच गई हैं। फिनटेक सेक्टर ने सबसे तेज उछाल दिखाया है। 2015 में यह लगभग न के बराबर था, जबकि आज यह BFSI मार्केट का 4% हिस्सा बन चुका है। डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन ट्रेडिंग और आसान वित्तीय सेवाएं इसकी बड़ी वजह हैं।

NBFCs की रिकॉर्ड ग्रोथ

NBFC सेक्टर ने 20 साल में लगभग 100 गुना विस्तार किया है। 2005 में इनकी कीमत ₹26,000 करोड़ थी जो अब बढ़कर ₹25.8 लाख करोड़ हो गई है। इसी दौरान नई पीढ़ी की डिजिटल और कैपिटल मार्केट कंपनियों ने BFSI की कुल ग्रोथ में 11% तक योगदान दिया है और अपनी profitability भी तेजी से बढ़ाई है।

अनलिस्टेड कंपनियों का बढ़ता प्रभाव

कई बड़ी BFSI कंपनियां अभी शेयर बाजार में लिस्ट नहीं हैं। इनका कुल मूल्य करीब ₹9 लाख करोड़ है, जो नॉन-बैंक BFSI मार्केट कैप का लगभग 20% हिस्सा है। ICICI Prudential MF, SBI Mutual Fund और PhonePe जैसी कंपनियां IPO लाने की तैयारी में हैं, जिससे आने वाले वर्षों में यह सेक्टर और मजबूत होगा।

शेयर बाजार में बढ़ा असर

Nifty-50 में BFSI सेक्टर का वेटेज FY05 के 13.4% से बढ़कर अक्टूबर 2025 में 36.3% पहुंच गया है। यानी अब Nifty-50 की हर तीन में से एक कंपनी BFSI से जुड़ी है। निजी और सरकारी दोनों ही बैंकों के प्रदर्शन में सुधार ने इस सेक्टर की हिस्सेदारी को और मजबूत किया है।

कमाई में मजबूत सुधार

NBFCs का मुनाफा 10 साल में चार गुना बढ़ा है, जबकि प्राइवेट बैंकों की कमाई पांच गुना रही है। सरकारी बैंकों ने भी FY20 में हुए ₹26,000 करोड़ के नुकसान से उबरकर FY25 में ₹1.86 लाख करोड़ का मुनाफा कमाया है। रिपोर्ट के मुताबिक FY26 से FY28 के बीच BFSI सेक्टर हर साल 18–20% की दर से कमाई बढ़ाता रहेगा।

फिनटेक और डिजिटल मॉडल ने बदला खेल

आज BFSI सेक्टर सिर्फ पारंपरिक मॉडल पर निर्भर नहीं है। PhonePe, Google Pay, Zerodha, Groww और Upstox जैसे प्लेटफॉर्म ने डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन निवेश और फाइनेंशियल मैनेजमेंट को आसान बना दिया है। अब लोग मोबाइल से भुगतान, निवेश और लोन जैसी सेवाएं आसानी से ले रहे हैं।

इन डिजिटल प्लेटफॉर्म की बैंक और NBFCs के साथ साझेदारी ने को-लेंडिंग और डिजिटल अंडरराइटिंग को तेजी से बढ़ाया है, जिससे सेक्टर की ग्रोथ और मजबूत हुई है।

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